जमुई/बिहार। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को समग्र सेवा, जमुई की ओर से जिले के बरहट एवं खैरा प्रखंडों के 220 महादलित मुसहरी टोलों में सामुदायिक स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। गांधी जयंती को संस्था की ओर से इस वर्ष ‘सामुदायिक स्वच्छता संकल्प’ के रूप में मनाया गया। अभियान में गांव के महिला-पुरुषों के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों, आदर्शों और उनके सपनों के भारत की अवधारणा के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से गांधी जी द्वारा स्वच्छता को दिए गए महत्व पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों को बताया गया कि स्वच्छता केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वच्छ परिवेश स्वस्थ जीवन और बेहतर समाज की बुनियाद है।
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित अभियान में ग्रामीणों ने स्वच्छता के महत्व को समझते हुए स्वयं आगे बढ़कर सफाई अभियान में भाग लिया। महिला, पुरुष और बच्चों ने अपने घरों से झाड़ू, कुदाल और टोकरी आदि लेकर घरों के आसपास तथा सार्वजनिक स्थलों की सफाई की। लोगों ने आपसी सहयोग और मेलजोल के साथ गलियों, रास्तों तथा आसपास के स्थानों से कूड़ा-कचरा हटाया। इस दौरान ग्रामीणों में स्वच्छता को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
सफाई अभियान के बाद ग्रामीणों ने अपने गांव और आसपास के सार्वजनिक स्थानों को नियमित रूप से साफ-सुथरा रखने का संकल्प लिया। संस्था के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा बच्चों में भी साफ-सफाई की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद ग्रामीणों की सहभागिता से सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। गांधी जी के विचारों और उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रैली भी निकाली गई। रैली के माध्यम से स्वच्छता, आपसी भाईचारे, सद्भाव और गांधीवादी मूल्यों का संदेश दिया गया। ग्रामीणों ने गांधी जी के आदर्शों को अपनाने तथा समाज में स्वच्छता और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
पतौना पहाड़ मुसहरी टोले में बच्चों ने प्रस्तुत की गांधी जी की झांकी
गांधी जयंती के अवसर पर पतौना पहाड़ स्थित मुसहरी टोले में बच्चों ने विशेष उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। बच्चों ने महात्मा गांधी और उनके तीन बंदरों पर आधारित झांकी प्रस्तुत कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। झांकी के माध्यम से गांधी जी के प्रसिद्ध संदेशों को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।
सरयू सेवा सदन में सर्वधर्म प्रार्थना सह संगोष्ठी
गांधी जयंती के अवसर पर समग्र सेवा के मुख्यालय स्थित सरयू सेवा सदन में भी विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्था के सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा संस्था की ओर से उच्च शिक्षा के लिए सहयोग प्राप्त कर रहे ‘भोला मांझी शिक्षा फेलोशिप’ के 21 बच्चों की मौजूदगी में सर्वधर्म प्रार्थना सह संगोष्ठी आयोजित हुई।
संगोष्ठी में महात्मा गांधी के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और उनके सपनों के भारत पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में संस्था के मकेश्वर ने गांधी जी के विचारों को सामने रखते हुए कहा कि गांधी जी ऐसा भारत चाहते थे, जहां समाज के सबसे गरीब व्यक्ति को भी यह महसूस हो कि यह देश उसका अपना है और वह देश के विकास में बराबर का भागीदार है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के सपनों के भारत के निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा के माध्यम से समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना केवल उनके व्यक्तिगत भविष्य को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि इससे समाज और राष्ट्र के विकास की नींव भी मजबूत होती है।
कार्यक्रम में मौजूद बच्चों को गांधी जी के सत्य, अहिंसा, सादगी, स्वच्छता, समानता और सेवा के विचारों से परिचित कराया गया। बच्चों से आह्वान किया गया कि वे अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अपनी भूमिका निभाएं।
संगोष्ठी के दौरान राजेश, अजय कुमार सिंह, बालेश्वर यादव, अविनाश, सौरभ सहित अन्य लोगों ने भी महात्मा गांधी के आदर्शों और उनके विचारों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं और स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक सद्भाव तथा सेवा जैसे विषयों पर उनके संदेश वर्तमान समय में भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
गांधी जयंती पर समग्र सेवा की ओर से आयोजित यह पहल केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण समुदाय की प्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और गांधीवादी मूल्यों को व्यवहार में उतारने का प्रयास बनी। 220 महादलित मुसहरी टोलों में ग्रामीणों की सहभागिता से चलाए गए स्वच्छता अभियान ने सामुदायिक जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास का संदेश दिया।
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