जमुई/बिहार। जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत कोल्हुआ अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने केंद्र पर शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस संबंध में स्वास्थ्य उपकेंद्र में कार्यरत एएनएम कर्मियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गिद्धौर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवेदन देकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की है। आवेदन में स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया है कि केंद्र पर उपलब्ध शौचालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिसके कारण विशेषकर महिला कर्मियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एएनएम पूजा कुमारी, सुशीला कुमारी, शैलजा एवं विनीता कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि कोल्हुआ स्वास्थ्य उपकेंद्र में दो शौचालय तो उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें से एक शौचालय अत्यधिक गंदगी के कारण उपयोग योग्य नहीं रह गया है। वहीं दोनों शौचालयों में दरवाजे नहीं लगे होने के कारण गोपनीयता और सुरक्षा की समस्या उत्पन्न हो रही है। महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि इस स्थिति में उन्हें कार्य के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में शौचालयों की नियमित सफाई, आवश्यक मरम्मत तथा दरवाजों की व्यवस्था कराना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और वे बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशासन से मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
इस आवेदन का अनुमोदन कोल्हुआ अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. परमानंद कुमार रजक ने भी किया है। उन्होंने आवेदन पर अपनी टिप्पणी में लिखा है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आवेदन को अग्रसारित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, गिद्धौर को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है।
इधर, इस मामले ने उस समय और अधिक चर्चा का विषय बना लिया जब डॉ. परमानंद कुमार रजक ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि महिला कर्मियों के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है, जबकि संबंधित अधिकारी उच्च चिकित्सा योग्यता रखते हैं। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं और आधारभूत सुविधाओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में जहां मरीजों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता होती है, वहीं वहां कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी न्यूनतम आधारभूत सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से महिला कर्मियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था किसी भी सरकारी संस्थान की प्राथमिक आवश्यकता मानी जाती है।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा उठाई गई इस समस्या पर स्वास्थ्य विभाग कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेता है और कोल्हुआ स्वास्थ्य उपकेंद्र में शौचालय की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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