रामनगर में आज से गूंजेगी रामकथा, एक मंच नहीं पूरा नगर बनेगा लीला क्षेत्र; 25 अक्टूबर तक चलेगा आयोजन


वाराणसी/रामनगर | 25 सितंबर 2026। अनंत चतुर्दशी के साथ शुक्रवार से रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ होने जा रहा है। करीब 200 साल पुरानी इस परंपरा में अगले एक महीने तक रामनगर के अलग-अलग हिस्सों में रामकथा के प्रसंग जीवंत होंगे। 25 अक्टूबर को श्रीराम राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा।

रामनगर की रामलीला की सबसे खास बात इसका अनोखा आयोजन है। यहां किसी एक मंच पर पूरी रामलीला नहीं होती, बल्कि करीब 5 से 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले लगभग 40 खुले लीला स्थलों पर कथा के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन किया जाता है। दर्शक भी कथा के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचते हैं।

रावण जन्म से शुरू होगी रामलीला

पहले दिन 25 सितंबर को रावण जन्म, दिग्विजय, क्षीर सागर की झांकी, देव स्तुति और आकाशवाणी के प्रसंगों का मंचन होगा। इसके बाद रामकथा क्रमशः आगे बढ़ेगी।

26 सितंबर को श्रीराम जन्म, विराट दर्शन और बाललीला का मंचन होगा, जबकि 27 सितंबर को विश्वामित्र आगमन, ताड़का-सुबाहु वध, मारीच, अहल्या तारण और गंगा दर्शन के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।

रामलीला में ये तारीखें रहेंगी खास

  • 28 सितंबर: जनकपुर दर्शन, अष्ट-सखी संवाद और फुलवारी
  • 29 सितंबर: धनुष यज्ञ और परशुराम संवाद
  • 30 सितंबर: अवध से बारात प्रस्थान और जनकपुर विवाह
  • 1 अक्टूबर: बारात विदाई और अवध में परिछन
  • 2 अक्टूबर: राज्याभिषेक समारोह और कोपभवन
  • 3 अक्टूबर: वनगमन और निषाद मिलन
  • 4 अक्टूबर: गंगा अवतरण, भरद्वाज संगम और चित्रकूट निवास
  • 5 से 9 अक्टूबर: भरत आगमन, चित्रकूट प्रसंग, जयंत नेत्र-भंग, विराध वध और पंचवटी निवास
  • 10 अक्टूबर: शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और सीता हरण
  • 11 अक्टूबर: जानकी वियोग, जटायु अंत्येष्टि और शबरी प्रसंग
  • 12 अक्टूबर: बालि वध और हनुमान का लंका प्रस्थान
  • 13 अक्टूबर: सीता दर्शन और लंका दहन
  • 14 से 16 अक्टूबर: सुग्रीव सेना, सेतु निर्माण और विभीषण मिलन
  • 17 अक्टूबर: कुंभकर्ण वध और मेघनाद युद्ध
  • 18-19 अक्टूबर: रावण युद्ध
  • 20 अक्टूबर: श्रीराम विजय
  • 21 अक्टूबर: विभीषण राजतिलक और श्रीजानकी मिलन
  • 22 अक्टूबर: श्रीराम का अवध प्रस्थान
  • 23 अक्टूबर: श्रीराम-भरत मिलाप
  • 24 अक्टूबर: श्रीराम राज्याभिषेक
  • 25 अक्टूबर: श्रीराम अवध विहार, मंदाकिनी मिलन और पुरजनोपदेश

मशाल-पेट्रोमैक्स की रोशनी में दिखेगी रामकथा

रामनगर रामलीला आज भी अपनी पारंपरिक प्रस्तुति शैली को बनाए हुए है। यहां आधुनिक मंच और तकनीकी तामझाम के बजाय मशाल और पेट्रोमैक्स की रोशनी में लीला का मंचन होता है। कलाकार ऊंची आवाज में संवाद बोलते हैं और दर्शक विभिन्न लीला स्थलों तक पहुंचकर कथा के प्रसंग देखते हैं।

शाम 5 से रात 8 बजे तक होगा आयोजन

कार्यक्रम के अनुसार रामलीला का सामान्य समय प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक रखा गया है। अलग-अलग दिनों में निर्धारित लीला स्थल पर संबंधित प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

काशी की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी परंपरा

काशी नरेश के संरक्षण में चली आ रही रामनगर रामलीला लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही है। इसकी सबसे अलग पहचान यही है कि यहां मंच सीमित नहीं, बल्कि पूरा रामनगर ही रामकथा का मंच बन जाता है।

अनंत चतुर्दशी से शुरू होने वाला यह आयोजन 25 अक्टूबर तक चलेगा और अंतिम चरण में श्रीराम राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा।

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