जमुई/बिहार। हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक चेतना को समर्पित साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रकल्प ‘पगडंडी जमुई’ के तत्वावधान में हिन्दी पखवारा के अंतर्गत समग्र भारत न्यास, जमुई का दसवां संस्करण दिनकर जयंती सह सम्मान समारोह शुक्रवार को शहर के न्यू शगुन वाटिका में आयोजित हुआ। सुबह 10:30 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, संस्कृति, संगीत और भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान साहित्यिक विमर्श और सांस्कृतिक सरोकारों पर भी चर्चा हुई।
समारोह का उद्देश्य हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति लोगों में रुचि बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में रचनात्मक एवं सामाजिक योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन करना रहा। कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, शिक्षाविद और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
समग्र भारत न्यास के संस्थापक डॉ. रविश कुमार सिंह ने आयोजन के संबंध में कहा कि हिन्दी पखवारा के तहत आयोजित यह दसवां संस्करण साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हिन्दी और स्थानीय भाषाओं की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने तथा रचनात्मक कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करना संस्था की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
समग्र भारत न्यास की मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी वीणा सिंह ने भी आयोजन के उद्देश्य और सम्मानित होने वाले व्यक्तित्वों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य, पत्रकारिता, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से समाज में सकारात्मक कार्यों के प्रति प्रेरणा बढ़ती है।
हिन्दी साहित्य और नाटक के क्षेत्र में सम्मान
समारोह में पं. जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी हिन्दी सेवी सम्मान से वर्ष 2025 के लिए हिन्दी साहित्य में मौलिक लेखन के लिए शिवनंदन सलिल तथा वर्ष 2026 के लिए नाटक लेखन, निर्देशन और मंचन के क्षेत्र में योगदान के लिए कपिलदेव मंडल को सम्मानित किया गया।
सम्मान प्राप्त करने वालों ने हिन्दी साहित्य और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने हिन्दी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी विचार रखे।
भजन और शास्त्रीय गायन के लिए सम्मान
अर्जुनदास सरस्वती सम्मान के तहत वर्ष 2025 के लिए भजन लेखन एवं गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए महंथ यमुना राम को सम्मानित किया गया। वहीं वर्ष 2026 के लिए भक्ति परक रचनाओं के लेखन एवं शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए कपिलदेव कृपाला को सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह के दौरान साहित्य और संगीत के पारस्परिक संबंध तथा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में भक्ति साहित्य और संगीत की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
पत्रकारिता, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में भी सम्मान
समारोह में नेतृत्व प्रतिदर्श सम्मान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। साहित्यिक पत्रकारिता एवं संपादन कला के लिए चंदन केशरी, पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए मनोज तिवारी तथा कुशल संवाद संप्रेषण के लिए अभिषेक कुमार सिन्हा को सम्मान प्रदान किया गया।
अंग्रेजी साहित्य में मौलिक लेखन के लिए कुमुद कुमार, समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए पंकज कुमार सिंह और महिला जागरुकता एवं विकास के क्षेत्र में कार्य के लिए बेबी कुमारी को सम्मानित किया गया।
वहीं संस्कृति जागरण के क्षेत्र में योगदान के लिए राजीव पाण्डेय तथा संगीत शिक्षण, विरासत और संस्कृति संरक्षण के लिए देवेन्द्र प्रसाद सिंह को सम्मानित किया गया।
अंगिका साहित्य की सेवा के लिए महेन्द्र प्रसाद ‘निशाकर’ सम्मानित
साहित्य सेवा सम्मान के तहत अंगिका साहित्य की सेवा के लिए महेन्द्र प्रसाद ‘निशाकर’ को सम्मानित किया गया। समारोह में अंगिका सहित क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान उसकी भाषा, लोक परंपरा, साहित्य और कलाओं से जुड़ी होती है। ऐसे में स्थानीय भाषाओं और साहित्य को प्रोत्साहित करना सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आवश्यक है।
साहित्य और समाज के बीच संवाद का माध्यम बना आयोजन
दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित इस समारोह में हिन्दी साहित्य की समृद्ध परंपरा और वर्तमान समय में साहित्य की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में मौजूद साहित्यकारों और अतिथियों ने रचनात्मक लेखन, पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए।
आयोजकों ने कहा कि ‘पगडंडी जमुई’ के माध्यम से जमुई में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। समग्र भारत न्यास का दसवां संस्करण इसी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किए जाने से कार्यक्रम में साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल बना रहा। आयोजन के समापन के साथ हिन्दी पखवारा के तहत साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को लेकर संवाद को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
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