सीवान/बिहार। बिहार के सीवान जिले के अमलोरी सरसार स्थित ऐतिहासिक "विद्या बाबू की हवेली" आज भी अपने गौरवशाली अतीत की गवाही देती नजर आती है। स्थानीय लोगों के बीच अमलोरी दरबार अथवा अमलोरी किला के नाम से प्रसिद्ध यह भव्य हवेली लगभग एक शताब्दी पूर्व क्षेत्र के प्रतिष्ठित जमींदार बाबू विद्या सिंह, जिन्हें राजा विद्यानंद सिंह के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा बनवाई गई थी। एक समय यह हवेली अपने शाही ठाठ-बाठ, भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरे इलाके की पहचान मानी जाती थी।
बताया जाता है कि हवेली के निर्माण में उस दौर की उत्कृष्ट स्थापत्य कला का प्रयोग किया गया था। विशाल द्वार, मजबूत दीवारें, कलात्मक खिड़कियां और राजसी शैली में निर्मित भवन दूर-दूर से आने वाले लोगों को आकर्षित करते थे। यह परिसर न केवल अमलोरी क्षेत्र बल्कि पूरे सीवान जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता रहा है।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, उस समय हवेली में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होता था। यहां क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों का आना-जाना लगा रहता था और यह भवन सामाजिक जीवन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलती चली गईं। बाबू विद्या सिंह का कोई पुत्र नहीं था और उनकी पुत्रियों का विवाह अन्य स्थानों पर होने के बाद परिवार का यहां स्थायी निवास समाप्त हो गया। परिणामस्वरूप यह विशाल हवेली धीरे-धीरे वीरान होती चली गई।
कई वर्षों से बंद पड़ी इस ऐतिहासिक इमारत का समुचित रखरखाव नहीं हो सका। देखरेख के अभाव में हवेली की भव्यता अब धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है। भवन के कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं और दीवारों पर समय की मार साफ दिखाई देती है। वर्तमान में हवेली के मुख्य द्वार पर ताला लगा रहता है तथा अंदर का अधिकांश हिस्सा खंडहर का रूप ले चुका है।
सीवान शहर से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह ऐतिहासिक स्थल आज भी इतिहास प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि इसके संरक्षण की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। स्थानीय नागरिकों और इतिहास के जानकारों का मानना है कि यदि इस धरोहर का संरक्षण और जीर्णोद्धार कराया जाए तो यह क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को नई पहचान देने के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्षेत्र के लोगों ने राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि अमलोरी की इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर इसे पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिलाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें। वर्तमान में यह हवेली अपने सुनहरे अतीत की यादों को संजोए हुए संरक्षण और पुनर्जीवन की प्रतीक्षा कर रही है।
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