कोलकाता/पश्चिम बंगाल। राज्य की विधानसभा में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित आरक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित किए गए हैं। इन संशोधनों के बाद राज्य की OBC सूची, आरक्षण व्यवस्था और पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े कानूनी ढांचे में कई अहम परिवर्तन किए गए हैं। इन बदलावों को लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
विधानसभा में पारित संशोधनों के अनुसार, मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के अनुरूप OBC सूची का पुनर्गठन किया गया है। इसके तहत OBC सूची में शामिल 77 मुस्लिम समुदायों को सूची से बाहर किए जाने का प्रावधान किया गया है। यह कदम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उठाया गया बताया जा रहा है।
नए कानूनी ढांचे के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों से बाहर की 66 जातियों को OBC आरक्षण के लिए पात्र माना गया है। इसके साथ ही OBC वर्गीकरण की प्रक्रिया में भी संशोधन किए गए हैं, ताकि पात्र समुदायों की नई सूची के आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू की जा सके।
विधानसभा में पारित संशोधनों के अनुसार, OBC आरक्षण का प्रतिशत भी 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किए जाने का प्रावधान शामिल किया गया है। इसके अलावा OBC श्रेणियों के पुनर्गठन के तहत मुस्लिम और हिंदू उप-जातियों की संख्या में भी परिवर्तन किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संशोधित व्यवस्था में 65 मुस्लिम उप-जातियों और 9 हिंदू उप-जातियों को पूर्व सूची की तुलना में कम किया गया है।
इसी क्रम में पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 में भी संशोधन किया गया है, ताकि नई व्यवस्था के अनुरूप आयोग की भूमिका और OBC सूची निर्धारण की प्रक्रिया को कानूनी आधार प्रदान किया जा सके।
इन संशोधनों के बाद राज्य में आरक्षण नीति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इन बदलावों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक पक्ष इसे न्यायालय के आदेश के अनुरूप उठाया गया आवश्यक कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की मंशा और आरक्षण नीति पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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