₹1.20 करोड़ के लेनदेन मामले में पूजा ग्रोवर को राहत नहीं, कोर्ट ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज


कैंट थाने के मुकदमे में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के आरोप; अभियोजन ने जमानत का किया विरोध

वाराणसी | 21 सितंबर 2026। थाना कैंट में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़े मुकदमे में आरोपी पूजा ग्रोवर को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-5 यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

मामला मुकदमा संख्या 322/2026 से जुड़ा है। इसमें शिकायतकर्ता की ओर से करोड़ों रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी किए जाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं।

साड़ी कारोबार के नाम पर रकम देने का दावा

अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता पियूष वर्मा ने अदालत को बताया कि वर्ष 2016-17 में साड़ी कारोबार से जुड़े लेनदेन के सिलसिले में आरोपी पक्ष को करीब ₹1.20 करोड़ की राशि दी गई थी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि यह रकम ब्याज पर असुरक्षित ऋण के तौर पर दी गई थी। हालांकि, आरोपी पक्ष ने लेनदेन और उससे जुड़े आरोपों को लेकर अलग पक्ष अदालत के सामने रखा है।

मामले में MOU, बैंक खातों के लेनदेन, चेक और PAN कार्ड से संबंधित दस्तावेज भी जांच का हिस्सा हैं।

दो PAN कार्ड का मामला भी सामने आया

अदालत के आदेश के अनुसार, अभियोजन ने आयकर विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पूजा ग्रोवर के नाम से दो PAN कार्ड होने की जानकारी सामने आई है। अभियोजन के मुताबिक, दोनों में पिता का नाम और पता अलग-अलग दर्ज बताया गया है।

बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि दो PAN कार्ड की जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग को एक PAN कार्ड निरस्त करने के लिए आवेदन किया गया था।

MOU और चेक को लेकर आमने-सामने दावे

शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि MOU के आधार पर दिए गए कुछ चेक बैंक में अनादरित हो गए। वहीं, आरोपी पक्ष ने MOU को ही फर्जी और कूटरचित बताते हुए आरोपों से इनकार किया।

बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि इसी विवाद से संबंधित पूर्व की कार्यवाही में आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। साथ ही वर्तमान FIR में पुराने विवाद के साथ नए आरोप जोड़े जाने की दलील दी गई।

विवेचना जारी, कोर्ट ने जमानत से किया इनकार

अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया। आदेश में कहा गया कि मामले में कूटरचित दस्तावेजों और बड़ी धनराशि से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही विवेचना अभी जारी है और आगे साक्ष्य सामने आना बाकी है।

धनराशि वापस किए जाने या नहीं किए जाने के सवाल को अदालत ने साक्ष्य और विचारण से संबंधित विषय माना।

इन परिस्थितियों में अदालत ने अग्रिम जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और प्रार्थना-पत्र संख्या 3215/2026 खारिज कर दिया।

अभियोजन की ओर से विनय कुमार ने रखा पक्ष

मामले में अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विनय कुमार ने पैरवी की।

महत्वपूर्ण: खबर में उल्लेखित आरोप अभियोजन और संबंधित पक्षों की ओर से अदालत में रखी गई दलीलों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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