Bihar News: भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों का फूटा आक्रोश, मदद नहीं मिलने पर प्रशासन को घेरने की चेतावनी

भागलपुर/बिहार। जिले के मदरोनी क्षेत्र में बाढ़ की मार झेल रहे विस्थापित परिवारों का गुस्सा अब प्रशासन के खिलाफ खुलकर सामने आने लगा है। बाढ़ के कारण घर छोड़कर रेलवे ट्रैक के आसपास शरण लिए लोगों का कहना है कि कई दिनों से वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से उन्हें राहत सामग्री के नाम पर पर्याप्त मदद नहीं मिली है।

धूप और बारिश के बीच कट रही जिंदगी

बाढ़ प्रभावित परिवारों ने बताया कि घरों में पानी घुसने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान की तलाश में अपना घर छोड़ना पड़ा। फिलहाल कई परिवार रेलवे ट्रैक के पास किसी तरह अपना ठिकाना बनाकर रह रहे हैं। यहां न तो रहने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही मौसम से बचाव के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध है। पीड़ितों का आरोप है कि तेज धूप और बारिश के बीच छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में दिन गुजारना पड़ रहा है।

पन्नी तक उपलब्ध नहीं कराने का आरोप

विस्थापितों का कहना है कि प्रशासन से राहत के लिए लगातार गुहार लगाई जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें पन्नी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका कहना है कि यदि सिर छिपाने के लिए पन्नी मिल जाती तो कम से कम बारिश से परिवारों को कुछ राहत मिल सकती थी। राहत सामग्री और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

समाजसेवी के सामने रखी अपनी समस्याएं

मदरोनी में बाढ़ प्रभावित लोगों ने समाजसेवी सुजीत सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं साझा कीं। लोगों ने उन्हें बताया कि प्रशासनिक स्तर पर राहत मिलने में हो रही देरी के कारण उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है। विस्थापित परिवारों ने तत्काल पन्नी और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

बाढ़ पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक उन्हें पन्नी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके साथ ही लोगों ने मंगलवार को सड़क जाम करने की भी बात कही है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक मुद्दे से जुड़ी नहीं, बल्कि बाढ़ के बीच सुरक्षित रहने के लिए बुनियादी राहत और मानवीय सहायता की है।

बाढ़ प्रभावितों के बढ़ते आक्रोश के बीच अब लोगों की निगाह प्रशासन की ओर है कि उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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