वाराणसी में कृषि संगोष्ठी का आयोजन, 30 स्टॉलों पर दिखीं उन्नत तकनीकें; अचार-मुरब्बा और पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं महिला किसान
वाराणसी। किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और आय के नए स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से वाराणसी में वृहद कृषि ज्ञान संगोष्ठी सह किसान मेले का आयोजन किया गया। संभागीय कृषि परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 280 महिला कृषकों समेत सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों ने किसानों को बेहतर उत्पादन, गुणवत्तायुक्त बीज और कृषि आधारित स्वरोजगार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में फसल अवशेष प्रबंधन, उन्नत बीज, उद्यानिकी, श्रीअन्न की खेती, समेकित कीट प्रबंधन और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर विशेष चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और उनकी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया।
गेहूं, चना, मटर और सरसों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान
रबी सीजन को देखते हुए किसानों को बीज वितरण योजना की जानकारी दी गई। संयुक्त कृषि निदेशक शैलेन्द्र कुमार ने श्रीअन्न की खेती को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया।
जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने बताया कि रबी अभियान के तहत गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों के गुणवत्तायुक्त बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गेहूं बीज वितरण के लिए निर्धारित 49,015 पैकेट के लक्ष्य के मुकाबले 36,885 पैकेट की ऑनलाइन बुकिंग हो चुकी है। अभी 12,130 पैकेट की बुकिंग शेष है। किसानों से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बुकिंग कराने और समय से बुवाई पूरी करने की अपील की गई।
वैज्ञानिकों ने बताए कम लागत और बेहतर उत्पादन के तरीके
किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों ने अलग-अलग फसलों की उन्नत खेती और उत्पादन तकनीकों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की।
कृषि विज्ञान केंद्र, वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत और डॉ. मनीष पांडेय ने उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में बताया। डॉ. अमितेश कुमार सिंह ने धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और उनके उपयोग की जानकारी दी।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के डॉ. सुनील कुमार ने जीरो टिलेज विधि से गेहूं की खेती के फायदे समझाए। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव ने सब्जियों में समेकित कीट प्रबंधन के उपाय बताए। वहीं, राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के डॉ. ए.के. वर्मा ने गुणवत्तायुक्त बीजों की पहचान और उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
अचार-मुरब्बा बनाकर बढ़ा रहीं आय, पशुपालन से भी मिल रहा सहारा
किसान मेले में महिला कृषकों की सफलता की कहानियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि आधारित व्यवसायों की भूमिका को सामने रखा।
महिला किसान रेखा मौर्य ने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से अचार, मुरब्बा और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार करने तथा उनके प्रसंस्करण से उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला है। दूसरी ओर, संजू यादव ने पशुपालन के माध्यम से परिवार की आजीविका चलाने और आर्थिक स्थिति में सुधार के अपने अनुभव साझा किए।
इन उदाहरणों के जरिए किसानों को बताया गया कि खेती के साथ खाद्य प्रसंस्करण और पशुपालन जैसे कार्य अपनाकर आय के अतिरिक्त साधन विकसित किए जा सकते हैं। महिला कृषकों की भागीदारी को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
30 स्टॉलों पर मिली कृषि की नई तकनीकों की जानकारी
आयोजन स्थल पर लगभग 30 कृषि संबंधी स्टॉल लगाए गए थे। यहां किसानों और विद्यार्थियों ने विभिन्न कृषि गतिविधियों, उन्नत तकनीकों और उत्पादन पद्धतियों के बारे में जानकारी हासिल की। प्रतिभागियों ने शोध प्रक्षेत्र में पहुंचकर विभिन्न फसल प्रजातियों के परीक्षण और प्रदर्शनों का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान पांच प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। मेले में करीब 280 महिला कृषकों के साथ बड़ी संख्या में पुरुष किसान और इंटर कॉलेज के कृषि संकाय के विद्यार्थी शामिल हुए।
वैज्ञानिक खेती अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम का समापन उप कृषि निदेशक (शोध) शिव कुमार ने किया। उन्होंने कृषि अनुसंधान से जुड़ी जानकारियां साझा करते हुए किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, खेती में नवाचार करने और उन्नत पद्धतियों के जरिए उत्पादन बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल, राज कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा, स्नेह प्रभा, अशोक यादव, योगेंद्र यादव सहित कृषि विभाग और शोध केंद्र के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दुर्गेश सिंह ने किया।
किसान मेले का संदेश: गुणवत्तायुक्त बीज, आधुनिक तकनीक, फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन और कृषि आधारित व्यवसाय खेती को अधिक उपयोगी बनाने के अहम माध्यम हैं। महिला किसानों की भागीदारी और स्वरोजगार के प्रयास ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर विकसित करने में मददगार हो सकते हैं।
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