जमुई/बिहार। साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, लोकजीवन और ऐतिहासिक पहचान को सहेजने का सशक्त जरिया भी है। इसी भावना के साथ शनिवार को जमुई जिले के बरहट प्रखंड अंतर्गत मलयपुर स्थित हास्यरसावतार पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी स्मृति भवन में उनकी 151वीं जयंती समारोह-2026 का आयोजन किया गया। पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी साहित्य समाज न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कविता, हास्य-व्यंग्य और साहित्यिक विमर्श के जरिए महान साहित्यकार को श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में स्थानीय लोकभाषा, क्षेत्रीय साहित्य और जमुई की सांस्कृतिक विरासत पर विशेष चर्चा हुई।
प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया स्मरण
कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई। आयोजन में शामिल अतिथियों को अंगवस्त्र और श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया। वातावरण में साहित्यकार के प्रति श्रद्धा और उनकी रचनात्मक विरासत को याद करने का भाव दिखाई दिया।
कविताओं ने श्रोताओं को गुदगुदाया, भावनाओं से भी जोड़ा
समारोह में आयोजित काव्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को रोचक और जीवंत बना दिया। विनय मिश्र, शंभु कुमार, डॉ. नूतन सिंह, सोनी वर्णवाल, अंशुमान कुमार, अमित कुमार सिंह, रंजीत सिंह, हिमांशु कुमार और आर्या कुमार सहित अन्य कवियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कविताओं में मां-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम की अनुभूति, पारिवारिक संबंध, पति-पत्नी के बीच की नोकझोंक, समकालीन राजनीति तथा जमुई के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय शामिल रहे। हास्य और व्यंग्य से सजी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को खूब आनंदित किया। वहीं, संवेदनशील रचनाओं ने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को भावपूर्ण ढंग से सामने रखा।
गिद्धौरिया लोकभाषा की रचनाओं पर हुआ साहित्यिक मंथन
समारोह में स्थानीय लोकभाषा गिद्धौरिया की साहित्यिक विशेषताओं पर चर्चा ने खास महत्व हासिल किया। पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी की प्रसिद्ध रचना—
“पीताम्बर के भगवा पिन्हलें हाथें बंशी लेंलें।
जगन्नाथ घर ऐलखीं कान्हा रसें-रसें मुस्कैलें।।“
के माध्यम से गिद्धौरिया भाषा की मिठास, सहजता और लोकजीवन से उसके जुड़ाव को रेखांकित किया गया। इस रचना के संदर्भ में ज्योतीन्द्र मिश्र की पुस्तक ‘धोरैया’ की शिल्प-शैली और भाषाई विशेषताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
साहित्यिक चर्चा के दौरान गिद्धौरिया के भक्त कवि अर्जुनदास की रचनाओं और उनके साहित्यिक संसार को भी याद किया गया। वक्ताओं ने स्थानीय बोलियों में संरक्षित साहित्य को क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। डॉ. नूतन सिंह ने गिद्धौरिया गजल को स्वर देकर अपनी माटी की सौंधी खुशबू को शब्दों और सुरों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
चतुर्वेदी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुई चर्चा
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. रविश कुमार सिंह ने पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी के साहित्यिक योगदान और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने साहित्यकार की रचनात्मक पहचान और उनके साहित्यिक महत्व को रेखांकित किया।
न्यास के सचिव कन्हैया प्रसाद सिंह ने चतुर्वेदी जी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े प्रसंगों की चर्चा की। उनके वक्तव्य ने समारोह को केवल जयंती आयोजन तक सीमित न रखकर साहित्यकार के जीवन और विरासत को समझने का अवसर भी प्रदान किया।
जमुई के साहित्यिक इतिहास में मलयपुर की भूमिका रेखांकित
समारोह में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक कृष्णकांत मिश्र ने जमुई के साहित्यिक योगदान में मलयपुर की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने क्षेत्र की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को सामने रखा। कार्यक्रम में हुई चर्चाओं ने यह संदेश दिया कि स्थानीय साहित्यकारों और लोकभाषाओं को उचित मंच देकर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जा सकता है।
सरस्वती वंदना और राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में न्यास के सचिव कन्हैया प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन कर अतिथियों, कवियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद सरस्वती वंदना और राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ। आयोजन में उपस्थित लोगों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी।
पंडित जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी की 151वीं जयंती पर आयोजित यह समारोह साहित्यिक विरासत के सम्मान के साथ-साथ गिद्धौरिया लोकभाषा और जमुई की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का अवसर बना। कविताओं, हास्य-व्यंग्य और साहित्यिक संवादों से सजे इस आयोजन ने क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को याद करने और उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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