झारखंड शराब घोटाले की जांच में अनियमितता का आरोप, बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच की मांग उठाई

रांची/झारखंड, 22 अगस्त 2025। झारखंड की सियासत में एक बार फिर बहुचर्चित शराब घोटाला सुर्खियों में है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घोटाले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जानबूझकर जांच को कमजोर बना रही है, ताकि बड़े-बड़े षड्यंत्रकारियों और शराब माफियाओं को बचाया जा सके।

मरांडी ने पत्र में कहा कि इस घोटाले की जांच शुरू से ही केवल “जनता की आंखों में धूल झोंकने” के उद्देश्य से की गई। उनके अनुसार, प्रारंभ में एसीबी ने दिखावे के लिए एक वरीय अधिकारी की गिरफ्तारी कर तत्परता दिखाई थी। लेकिन इसके बाद से जांच की गति अचानक धीमी पड़ गई। तीन महीने बीत जाने के बावजूद अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिसके चलते जेल में बंद आरोपी एक-एक कर जमानत पर बाहर आ रहे हैं।

भाजपा नेता ने एसीबी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए लिखा कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अधिकारियों और पदाधिकारियों के बयान की पूरी रिकॉर्डिंग नहीं की गई। इससे जांच अधिकारियों को अपनी सुविधानुसार बयान लिखने का अवसर मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मनमानी के कारण असली दोषियों को बचाया जा रहा है और कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

मरांडी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को सीधा सवाल किया है—
“क्या यह सब आपकी सहमति से हुआ या अधिकारी अपने स्तर पर सौदेबाजी कर रहे हैं? इतना बड़ा गोरखधंधा आपकी जानकारी के बिना संभव नहीं। यदि आपकी अनुमति से यह सब हो रहा है तो राज्य भगवान भरोसे है। यदि बिना आपकी जानकारी के हुआ है, तो दोषी अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट और दिल्ली तक फैले बड़े माफिया नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, जांच अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर डील की, जिसके चलते समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी और आरोपियों को कानूनी राहत मिलती चली गई।

मरांडी ने यह भी कहा कि एसीबी की मौजूदा जांच केवल “दिखावा” है। इस कारण वास्तविक दोषियों को बचाया जा रहा है जबकि घोटाले में शामिल माफिया और उनकी साजिशें पर्दे के पीछे छिपाई जा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से स्पष्ट मांग की कि वे इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करें, ताकि घोटाले की परतें खुल सकें और असली षड्यंत्रकारी तथा उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों का चेहरा जनता के सामने आ सके।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मरांडी का यह पत्र न केवल सरकार पर सीधा हमला है, बल्कि आने वाले समय में झारखंड की राजनीति को और भी गरमाने वाला है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पर क्या रुख अपनाते हैं—क्या वे सीबीआई जांच के लिए कदम बढ़ाएंगे या इसे विपक्ष का राजनीतिक हथकंडा मानकर नजरअंदाज करेंगे।
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