लखनऊ/उत्तर प्रदेश। राजधानी लखनऊ से मानवता और संवेदनशीलता की एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी जीवन की ज्योति जलाए रखी जा सकती है। 42 वर्षीय संदीप कुमार ने इस दुनिया को अलविदा कहते हुए पांच लोगों को नई जिंदगी देकर एक अमिट उदाहरण स्थापित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी को संदीप कुमार एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। गंभीर हालत में उन्हें तुरंत संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई), लखनऊ में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने अथक प्रयास किए, लेकिन उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अंततः 22 फरवरी को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
ब्रेन डेड की पुष्टि के बाद डॉक्टरों ने संदीप की पत्नी से अंगदान के संबंध में बातचीत की। प्रारंभ में परिवार इस निर्णय को लेकर असमंजस में था। अपनों को खोने का दुख बेहद गहरा था, लेकिन जब चिकित्सकों ने समझाया कि अंगदान से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और यह एक महान मानवीय कदम होगा, तब संदीप की पत्नी और परिजनों ने साहस दिखाते हुए अंगदान के लिए सहमति दे दी।
परिवार की अनुमति मिलते ही डॉक्टरों की टीम सक्रिय हो गई। कानूनी औपचारिकताओं और पुलिस से समन्वय के बाद पीजीआई से किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस दौरान यातायात को पूरी तरह नियंत्रित कर 19 किलोमीटर की दूरी महज 18 मिनट में तय की गई। प्रशासन और पुलिस की तत्परता से समय पर अंगों को सुरक्षित पहुंचाया जा सका।
केजीएमयू में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैयार थी। वहां एक मरीज को लीवर प्रत्यारोपित किया गया, जबकि दोनों किडनियां पीजीआई में भर्ती दो अलग-अलग मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं। इसके अलावा, संदीप की आंखों से दो अन्य व्यक्तियों की आंखों की रोशनी लौट आई।
इस प्रकार संदीप कुमार ने मृत्यु के पश्चात पांच लोगों को नया जीवन देकर समाज के सामने अंगदान का एक प्रेरक संदेश रखा है। उनका यह निर्णय न केवल उनके परिवार के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि किसी एक व्यक्ति का त्याग कई घरों में खुशियां लौटा सकता है।
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