पटना/बिहार (Patna/Bihar), 13 अप्रैल 2026, सोमवार : बिहार की राजनीति में "सोशलिस्ट" शब्द का पुनः उदय हो गया है। चंद माह पहले समाजवादी माने जाने वाले नेता शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से चिंता जताई थी कि बिहार की राजनीति से "सोशलिस्ट" शब्द लुप्त हो गया है।
किंतु विगत बिहार विधानसभा चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के आठ प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद से लेकर पार्टी लगातार कुछ-न-कुछ राजनैतिक मामलों को लेकर अपनी सक्रियता बनाए हुए है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा जहां एक तरफ भाजपा की नीतियों को लेकर आक्रामक रहे हैं तो दूसरी तरफ वे जदयू, राजद जैसी समाजवादी पार्टियों के भ्रष्टाचार और परिवारवाद को लेकर भी मुखर रहे हैं।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की इस मुखरता ने राज्य में "सोशलिस्ट" शब्द को एक बार फिर से प्रासंगिक बना दिया है। अब राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपनी छात्र इकाई का नाम बदलकर "सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसियेशन ऑफ इंडिया" कर दिया है।
बिहार जो कभी सोशलिस्टों का गढ़ रहा है, एक बार फिर से "सोशलिस्ट" शब्द की प्रसांगिकता ने जेपी - लोहिया की यादों को ताजा कर दिया है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश उपाध्यक्ष विनय कुमार झा ने कहा कि पार्टी द्वारा लोकतंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य भर में "लोकतंत्र के प्रयोग" नाम से अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत आगामी बाँकीपुर उपचुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं के गोपनीय वोट से प्रत्याशी का चयन होगा। फिर इसी प्रकार कार्यकर्ताओं के गोपनीय वोट से ही आगामी सभी चुनावों में प्रत्याशियों का चयन होगा। संगठन के पद भी कार्यकर्ताओं के गोपनीय वोट से तय किये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसा करके सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) अन्य पार्टियों पर भी अपनी-अपनी पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए दवाब बनायेगी और सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं को उनका वाजिब हक दिलायेगी।
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