जमुई/बिहार। वीरता दिवस के अवसर पर जमुई में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्र और समाज की सुरक्षा में सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र की असली ताकत बताया।
सैनिक हिमालय की तरह अडिग प्रहरी: प्रो. गौरी शंकर पासवान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौरी शंकर पासवान (Gauri Shankar Paswan) ने कहा कि भारतीय सैनिक हिमालय की तरह अडिग प्रहरी हैं, जिनकी दृढ़ता और संकल्प पर पूरे राष्ट्र की सुरक्षा टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक और सुरक्षा कर्मी देश की ढाल हैं, जिनकी वीरता दुश्मनों के लिए वज्र के समान होती है।
उन्होंने सैनिकों के शौर्य की तुलना सूर्य से करते हुए कहा कि उनका साहस हर दिन देश के गौरव को नई ऊर्जा प्रदान करता है। राष्ट्र रक्षा में उनका योगदान अनमोल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
1965 की ऐतिहासिक वीरता का स्मरण
वक्ताओं ने 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के रण में स्थित सरदार पोस्ट पर हुए ऐतिहासिक घटनाक्रम को याद किया, जब Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) की एक छोटी टुकड़ी ने पाकिस्तानी हमले को बहादुरी से नाकाम कर दिया था। इस दौरान भारतीय जवानों ने 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कई को बंदी बना लिया था। इसी अद्वितीय साहस के सम्मान में हर वर्ष 9 अप्रैल को वीरता दिवस मनाया जाता है।
वीरता राष्ट्रभक्ति का सर्वोच्च रूप
प्रो. पासवान ने कहा कि जो सैनिक देश के लिए जीता है, वही सच्चा वीर होता है। वीरों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जब तक देश में शौर्य और साहस की ज्योति जलती रहेगी, तब तक भारत अजेय बना रहेगा।
वीरता केवल युद्ध नहीं, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संकल्प
इस मौके पर प्रगतिशील अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव सुभाष पासवान (Subhash Paswan) ने कहा कि वीरता दिवस सैनिकों की बहादुरी और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सैनिकों के लिए सीमा केवल एक भौगोलिक रेखा नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वीरता का अर्थ केवल युद्धभूमि में लड़ना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस रखना है।
सैनिक बटवृक्ष की तरह देश की रक्षा करते हैं
सुभाष पासवान ने सैनिकों की तुलना एक विशाल बटवृक्ष से करते हुए कहा कि वे हर तूफान और विपरीत परिस्थितियों को सहकर भी देश को सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सैनिकों की हिम्मत, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से संभव होती है।
हर नागरिक का कर्तव्य, सैनिकों का सम्मान
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे भारतीय सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि ये वीर जवान देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में हमेशा तत्पर रहते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने वीर जवानों के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए उनके योगदान को नमन किया और राष्ट्र सेवा के इस अद्वितीय जज्बे को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया।
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