नई दिल्ली, 22 अगस्त 2025। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं, मंदी की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के कपड़ा और परिधान क्षेत्र ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। जुलाई 2025 में कपड़ा निर्यात ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र न केवल भारत की पारंपरिक ताकत है, बल्कि रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन और आर्थिक विकास का भी मजबूत स्तंभ है।
डीजीसीआईएस के आंकड़ों में सकारात्मक इशारा
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCI&S) द्वारा जारी नवीनतम अनुमानों के अनुसार, जुलाई माह में प्रमुख कपड़ा वस्तुओं का निर्यात 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष जुलाई 2024 के 2.94 अरब डॉलर की तुलना में 5.3% की वृद्धि को दर्शाता है।
सिर्फ एक माह की वृद्धि ही नहीं, बल्कि अप्रैल-जुलाई 2025 की संचयी अवधि में भी भारत ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। इस अवधि में कुल निर्यात 12.18 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 11.73 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 3.87% अधिक है।
सेगमेंट-वार प्रदर्शन—रेडीमेड गारमेंट्स और हस्तशिल्प आगे
यदि निर्यात के विभिन्न सेगमेंट्स को देखा जाए तो रेडीमेड गारमेंट्स ने हमेशा की तरह सबसे बड़ा योगदान दिया। जुलाई 2025 में रेडीमेड कपड़ों का निर्यात 1.34 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष जुलाई के 1.28 अरब डॉलर की तुलना में 4.75% की वृद्धि है। वहीं अप्रैल-जुलाई 2025 की अवधि में यह निर्यात 7.87% बढ़कर 5.53 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 5.13 अरब डॉलर था।
सूती वस्त्रों (धागा, कपड़ा, मेड-अप्स और हथकरघा) का प्रदर्शन भी संतोषजनक रहा। जुलाई में इनका निर्यात 1.02 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 970.5 मिलियन डॉलर से 5.2% अधिक है। हालांकि अप्रैल-जुलाई की संचयी अवधि में इनका निर्यात लगभग स्थिर रहा—3.88 अरब डॉलर, जो पिछले वर्ष के 3.89 अरब डॉलर के बराबर है।
कालीन और हस्तशिल्प निर्यात ने विशेष मजबूती दिखाई। कालीन निर्यात में 8% से अधिक की वृद्धि हुई और यह 133 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। वहीं हस्तशिल्प निर्यात ने 10% से अधिक की दो अंकों वाली वृद्धि दर्ज की और जुलाई में इसका मूल्य 153.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
मंत्रालय का बयान और सरकारी योजनाओं का योगदान
कपड़ा मंत्रालय ने कहा कि जुलाई 2025 में छह प्रमुख कपड़ा वस्तु समूहों का कुल निर्यात 3.1 अरब डॉलर को पार करना इस बात का प्रतीक है कि भारत का कपड़ा उद्योग वैश्विक व्यापार की मिश्रित परिस्थितियों के बीच भी मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय ने रेडीमेड गारमेंट्स, जूट, कालीन और हस्तशिल्प की निरंतर वैश्विक मांग को वृद्धि का मुख्य आधार बताया।
बयान में यह भी कहा गया कि यह प्रदर्शन भारत की विविध उत्पाद क्षमता को दर्शाता है—जहाँ पारंपरिक कपास और हथकरघा उत्पादों से लेकर आधुनिक मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित वस्त्र, पर्यावरण-अनुकूल जूट उत्पाद और नवाचारपूर्ण टेक्निकल टेक्सटाइल्स तक सभी शामिल हैं।
सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं का भी उद्योग को लाभ मिला है। इसमें आरओएससीटीएल (Rebate of State and Central Taxes and Levies), आरओडीटीईपी (Remission of Duties and Taxes on Exported Products), वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, पीएम मित्रा पार्क्स, नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन, राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम जैसी पहलों का उल्लेख किया गया है। ये योजनाएं उद्योग को आधुनिकीकरण, नवाचार और विविधीकरण के लिए सक्षम बना रही हैं।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारतीय मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में मांग की सुस्ती और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अस्थिरता के बावजूद भारत का कपड़ा निर्यात टिकाऊ प्रदर्शन कर रहा है। इसका बड़ा कारण है—भारत की विविध उत्पाद शृंखला, प्रतिस्पर्धी लागत, और सरकारी समर्थन।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि यही रफ्तार बनी रही तो वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कपड़ा निर्यात 45 अरब डॉलर के लक्ष्य को छू सकता है। यह न केवल विदेशी मुद्रा अर्जन में बड़ी मदद करेगा, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित करेगा।
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