कम उम्र की छात्राओं को देह व्यापार में फँसाने का चल रहा रैकेट : धनंजय

पटना /बिहार। 5 जनवरी 2025 : सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने दावा किया है कि 12वीं के बाद अन्य जिलों से पढ़ाई के लिये पटना आने वाली कम उम्र की गरीब लड़कियों को देह व्यापार में फँसाने के लिये कुछ रैकेट सुनियोजित ढंग से कार्य कर रहे हैं। ऐसा पिछले 5-10 वर्षों से चल रहा है। इसे रोकना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इस सन्दर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अविलम्ब एक जाँच कमिटी गठित करने की माँग की है. साथ ही, ऐसे रैकेटों पर कार्रवाई का अनुरोध किया है।

उत्तराखंड की महिला मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की लड़कियों के बारे में अपमानजनक बयान दिये जाने के सन्दर्भ में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह समस्त बिहारवासियों का अपमान है। बिहार सरकार को भी इसकी आलोचना जरूर करनी चाहिए जिस पर अब तक कोई बयान नहीं आया है।

लेकिन साथ ही, गिरधारी लाल साहू के इस बेतरीके से दिये गये बयान के मद्देनजर उन्होंने कहा कि हमें अपने गिरेबान में भी झाँकने की ज़रूरत है। धनंजय ने बताया कि पिछले 5-10 वर्षों में उन्होंने कई बार अलग-अलग लोगों को इस प्रकार की चर्चा करते हुये सुना है कि 12वीं के बाद बिहार के अन्य जिलों से पटना में पढ़ने के लिये आने वाली कम उम्र की गरीब लड़कियाँ जो मुख्यतः प्राइवेट हॉस्टलों में रहती हैं, उन्हें देह व्यापार की तरफ बहकाने-उतारने के लिये कई गिरोह सक्रिय है जिनका फ्रंटल मोर्चा महिलाओं ने ही संभाल रखा है। वे इन कम उम्र की गरीब लड़कियों को लगातार तरह-तरह के आर्थिक प्रलोभन देती रहती हैं, और देर-सवेर अनेकों ऐसी कई लड़कियों को देह व्यापार में उतारने में सफल भी हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि पटना शहर में देह व्यापार में उतर चुकीं कम उम्र की ऐसी गरीब लड़कियों को कॉल गर्ल के नाम से पुकारा जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले 5-10 वर्षों में कई बार उन्होंने अलग-अलग लोगों को चर्चा करते सुना है कि ग्राहक इनके ठेकेदारों से सम्पर्क करते हैं तो कई लड़कियों के फोटो और उनका रेट ग्राहक को मोबाइल (व्हाट्सअप) पर भेज दिया जाता है, और फिर ग्राहक के द्वारा चुनी गई लड़की को ग्राहक के बुलाये गये स्थान पर भेज दिया जाता है।

इतना ही नहीं, अब तो इसके लिये कई वेबसाइट और एप के भी उपलब्ध होने की बातें कही जा रही हैं जिसके माध्यम से इस प्रकार की गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।

धनंजय ने कहा कि वेश्यावृति या परिपक्व महिलाओं द्वारा स्वेच्छा से अपने शरीर के लेन-देन के मामले में महिलाओं पर अंकुश लगाने के लिये वे नहीं कह रहे हैं। अगर अधिक उम्र की परिपक्व महिलाएँ अपनी स्वेच्छा और जरूरतों के अनुसार ऐसा कुछ कर रही हैं तो उस पर वे कुछ नहीं कहना चाहते है क्योंकि जिनका शरीर है, और वे उसका कैसे उपयोग करेंगी, यह स्त्रियों के स्वतंत्रता का मामला है जिसमें हस्तक्षेप का वे पक्षधर नहीं हैं। कम-से-कम स्त्रियाँ अपनी आर्थिक जरूरतों के लिये पुरूषों की तरह पॉकेटमारी-छिनतई तो नहीं कर रही हैं।

लेकिन धनंजय ने कहा कि वे इतना भर कहना चाहते है कि 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई कर रहीं कम उम्र की अपरिपक्व गरीब लड़कियों को पैसे के लालच में बहका-फुसला कर देह व्यापार में उतारने का जो रैकेट चल रहा है, उस पर सरकार को नकेल कसने की ज़रूरत है, क्योंकि एक बार भूलवश जब लड़कियाँ इस व्यापार में उतर जाती हैं तो फिर वे धीरे-धीरे ऐसी आदतों का शिकार हो जाती हैं, और फिर उन्हें इस धंधे से वापस निकाल पाना असंभव-सा हो जाता है।

उहोंने कहा कि जब वे विश्वविद्यालय में पढ़ते थे, तब वहाँ एक परम्परा नियम जैसा हुआ करती थी कि ग्रेजुएशन के छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में रहने के लिये सिंगल कमरा नहीं दिया जाता था क्योंकि उसके पीछे तर्क हुआ करता था कि कम उम्र के बच्चों में भावनाएँ ज़्यादा उमड़ती रहती हैं, और कभी अकेले में वे आत्महत्या न कर लें। रिसर्च स्कॉलर को अपेक्षाकृत अधिक परिपक्व मानते हुए उन्हें सिंगल कमरा अलॉट करने में प्राथमिकता दी जाती थी।

उसी प्रकार निश्चित ही यह सरकार का दायित्व है कि 12वीं के बाद अन्य जिलों से पढ़ने के लिये पटना आने वाली कम उम्र की ग़रीब लड़कियों को देह व्यापार से बचाने के लिये तुरंत आवश्यक प्रयास हो।

इस सन्दर्भ में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का आग्रह है कि :
1. इस मामले की सम्पूर्ण हकीकत को जानने के लिये अविलम्ब एक जाँच कमिटी का गठन हो।
2. अन्य जिलों से पटना आकर ग्रेजुएशन एवं एम.ए. स्तर तक की पढ़ाई करने वाली कम उम्र की लड़कियों के रिकॉर्ड को रखने के लिये सरकार द्वारा एक एप (APP) बनाया जाए जिसके माध्यम से ऐसी लड़कियों को आवश्यक सरकारी सहायताएँ एवं शिकायत करने की सुविधाएँ उपलब्ध हो।
3. सरकारी एवं निजी कॉलेज-हॉस्टल सहित सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे रैकेटों से बचने के लिये आवश्यक गाइडलाइंस के साथ बड़े नोटिस / पोस्टर लगाए जाएँ। निजी हॉस्टलों के प्रवेश स्थान / रिसेप्शन एरिया में ऐसे बड़े नोटिस / पोस्टर का सालों भर लगा रहना मैंडेटरी किया जाए।
4. सरकार द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भी अवेयरनेस कैंपेन चलाया जाए।
5. ऐसे रैकेटों को चिह्नित कर उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।  
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