प्रतिशोध से ज्यादा प्रेम शक्तिवान, डोभाल के बयान पर सोशलिस्ट पार्टी का पलटवार
पटना/बिहार, 12 जनवरी 2026 : एनएसए अजीत डोभाल के "प्रतिशोध" वाले बयान पर पलटवार करते हुए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने बयान जारी कर कहा कि "प्रेम" की शक्ति हर हमेशा "प्रतिशोध" की शक्ति से ज्यादा प्रभावी और कारगर रही है। डोभाल अगर श्रीराम के सहयोगी होते तो कैकयी का वध करवा देते। लेकिन तब राम आदर्श पुरूष कैसे कहलाते ?
विदित हो कि अजीत डोभाल ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का इतिहास अपमान और बेबसी से भरा रहा है। उन्होंने कहा कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। ‘प्रतिशोध' शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन प्रतिशोध एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा।
"प्रतिशोध" के इस बयान पर पलटवार करते हुए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष एवं यूपी चुनाव प्रभारी धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अजीत डोभाल देश की सुरक्षा मामलों के बड़े अधिकारी हैं। इन मामलों में उनकी भूमिका और योगदान प्रशंसनीय भी है। लेकिन देश के युवाओं को संबोधित करते समय शायद वे भूल गये कि बॉर्डर पर खड़े युवा सैनिकों से क्या बोलना है, और देश के आम युवाओं को क्या सिखाना है।
धनंजय ने कहा कि किसी भी सामान्य समाज में "प्रेम" की शक्ति "प्रतिशोध" की शक्ति से हर हमेशा ज्यादा प्रभावी और कारगर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास के संदर्भ में भी डोभाल एक सीमित दूरी तक ही देख पा रहे हैं। वे भारतीय इतिहास में दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के साथ हुए शोषण के इतिहास को छू भी नहीं पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि देश के युवाओं को इतिहास के प्रतिशोध का पाठ सिखाया जायेगा तो यह हिंदू-मुस्लिम झगड़े तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंदू समाज के ही भीतर दलित एवं अगड़ी जातियों के बीच झगड़े में भी तब्दील हो जायेगा, और अंततः बदले की आग स्त्री-पुरूष के सामूहिक झगड़े में भी तब्दील हो सकती है।
धनंजय ने कहा कि निश्चित ही हमें इतिहास से अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्कता का पाठ सीखना चाहिए, लेकिन अगर वर्तमान समाज को इतिहास से "प्रतिशोध" का पाठ सिखाया जाने लगा तब तो पूरा समाज आपस में ही लड़ने लगेगा। इससे देश कमजोर होगा, जिसका अमेरिका, चीन और पाकिस्तान जैसे देश लाभ उठा सकते हैं।
श्री सिन्हा ने कहा कि अजीत डोभाल जैसे वरिष्ठ अधिकारी को देश के संविधान का ध्यान रखना चाहिए, और उसके अनुकूल चलना चाहिये। लेकिन वे अब भाजपा के बताये रास्तों पर चलने लगे हैं और बंगाल चुनाव में हिंसा को भड़काने की आतुरता में दंगे लगाने वाले भड़काऊ बयान दे रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
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