जमुई/बिहार। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर दिन गुरुवार को जमुई जिले के लछुआर स्थित प्रबोध जन सेवा संस्थान के प्रधान कार्यालय परिसर में जरूरतमंद एवं बेसहारा लोगों के लिए कंबल वितरण कार्यक्रम (भाग–4) का आयोजन किया गया। यद्यपि अब कड़ाके की ठंड नहीं है, लेकिन सर्द मौसम को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने यह मानवीय पहल की, जिसने अनेक गरीब और असहाय परिवारों को राहत प्रदान की।
कार्यक्रम में विशेष रूप से विधवा महिलाओं एवं पूर्णतः बेसहारा व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। संस्थान की टीम ने न केवल कार्यक्रम स्थल पर कंबल वितरित किए, बल्कि जो लोग चलने-फिरने में असमर्थ थे, उनके घर तक स्वयं पहुँचकर कंबल और आवश्यक खाद्यान्न सामग्री भी उपलब्ध कराई।
संस्थान के सहयोगी रौशन सिंह ने कहा कि जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों से लगातार मकर संक्रांति के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है और यह अब एक सामाजिक परंपरा बन चुका है।
इससे पूर्व भी “प्रबोध जन सेवा संस्थान” की जमुई इकाई द्वारा तीन अनुकरणीय और चर्चित कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें पूरे जिले की सड़कों पर रातभर बेसहारा लोगों को कंबल बांटना, नक्सल प्रभावित क्षेत्र रजला जैसे दुर्गम गांवों में आदिवासी समाज के लोगों के बीच वितरण, तथा समाज के दिव्यांग वर्ग के लिए विशेष अभियान शामिल हैं।
कार्यक्रम में संस्थान से जुड़े रौशन सिंह, हरेराम सिंह, सौरभ मिश्रा, सुमित पांडे, धर्मेन्द्र चौधरी, सम्राठ सिंह, प्राची, संस्थान सचिव सुमन सौरभ सहित अनेक सेवा भावी लोग उपस्थित रहे।
संस्थान सचिव व सामाजिक कार्यकर्त्ता सुमन सौरभ ने कहा समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सके। मकर संक्रांति जैसे पर्व पर बेसहारा, विधवा और असहाय लोगों तक स्वयं पहुँचकर सहायता करना केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारा सामाजिक दायित्व है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा और अधिक दुर्गम क्षेत्रों तक राहत पहुँचाएगा।
वहीं संस्थान सहयोगी नाजिश अंसारी ने कहा कि इस कार्यक्रम में योगदान देना उनके लिए सौभाग्य की बात है और जरूरतमंदों की मदद करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
हरेराम सिंह ने इसे कमजोर वर्ग के लिए बड़ी राहत बताया, जबकि सौरभ मिश्रा ने कहा कि सेवा और सहयोग की भावना ही समाज की वास्तविक पहचान है।
स्थानीय नागरिकों ने भी संस्थान की पहल की सराहना की और इसे मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
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