प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों, त्याग और प्रेम को लेकर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक पति ने अपनी पत्नी की खुशी को सर्वोपरि रखते हुए उसे उसके प्रेमी के साथ विवाह के बंधन में बांध दिया। यह अनोखी घटना अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, प्रतापगढ़ जिले के निवासी आशीष तिवारी की शादी करीब 10 वर्ष पहले पिंकी से हुई थी। दोनों के दो बच्चे भी हैं। शुरुआती वर्षों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ पिंकी की बातचीत गांव के ही युवक अमित शर्मा से होने लगी। यह बातचीत धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। जब आशीष को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने शुरुआत में इसका विरोध भी किया और पत्नी को समझाने का प्रयास किया, लेकिन पिंकी अपने फैसले पर अडिग रही।
काफी सोच-विचार और पारिवारिक तनाव के बाद आशीष ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी गांव और समाज में कम ही मिसाल देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी पत्नी को जबरन रोकने या विवाद बढ़ाने के बजाय उसकी खुशी को स्वीकार किया और गांव के ही एक मंदिर में पिंकी की शादी उसके प्रेमी अमित शर्मा से करवा दी। मंदिर परिसर में सादे तरीके से हुई इस शादी में पिंकी ने जयमाल पहनाते हुए अमित के पैर छुए और उसे अपना पति स्वीकार किया।
इस दौरान भावुक पल तब आया जब पिंकी ने इच्छा जताई कि वह अपने दोनों बच्चों को भी अपने साथ ले जाना चाहती है। हालांकि बच्चों ने मां के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया। बच्चों का कहना था कि “तुमने हमारे पापा को छोड़ दिया, इसलिए हम तुम्हारे साथ नहीं जाएंगे।” बच्चों का यह फैसला सुनकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।
वहीं दूसरी ओर, अमित शर्मा के पिता ने भी पिंकी को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमित न तो नियमित रूप से काम करता है और शराब पीने की आदत भी है, ऐसे में वह उसके खर्च और भविष्य की जिम्मेदारी कैसे निभा पाएगा। उन्होंने पिंकी को आगाह किया कि आगे चलकर पछताना पड़ सकता है। लेकिन पिंकी पर इन बातों का कोई असर नहीं हुआ। अंततः अमित के पिता ने भी यह कहकर चुप्पी साध ली कि अब जो होना था, हो गया।
फिलहाल पिंकी अपने प्रेमी अमित शर्मा के साथ रह रही है और दोनों अपने नए जीवन की शुरुआत को लेकर खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि इस कहानी का भविष्य क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन पति द्वारा पत्नी की खुशी के लिए खुद पीछे हट जाना, प्रतापगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में एक अनोखे और चर्चित उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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