महिला आरक्षण बिल 2023 से है कानून, परिसीमन से जुड़ा संसोधन बिल गिरा, भ्रम फैला रहे मोदी : धनंजय

पटना/बिहार। सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल के नाम पर मोदी सरकार महिलाओं की आड़ में छुपकर महिलाओं को ही छलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपाइयों की यह पुरानी आदत है कि कभी वह राम की आड़ में छुपकर सनातन धर्म को बदनाम करती है तो अब महिलाओं की ही आड़ लेकर महिलाओं को ठगने का काम कर रही है। 

उन्होंने बताया कि लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का जो बिल 2023 में ही संसद से पास होकर कानून बन गया था, उसे लागू करने के बजाय उसे बाधित करने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने उसमें परिसीमन मामले को जोड़कर पुनः संसोधन के लिये संसद के पटल पर लाया जहाँ परिसीमन को जोड़ने वाला संसोधन बिल गिर गया। किंतु 2023 में पास महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल आज भी देश में कानून ही है जिसे शीघ्र लागू किया जाना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि भाजपा एवं उसकी मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरू पुरूष-प्रधान एवं महिला-शोषक संस्कृति की समर्थक रही है। इसलिए मोदी सरकार जान-बूझकर इस बिल को उलझाने के उद्देश्य से इसमें परिसीमन मामले को जोड़ दे रही है और प्रधानमंत्री मोदी रोने का झूठा नाटक कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण तो दिया ही जाना चाहिए। साथ में "जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" सिद्धांत के अनुसार उस तैंतीस प्रतिशत आरक्षण के भीतर भी जातिगत आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को भी संविधान में पूर्व से तय किये गये नियमों के अनुसार आरक्षण मिलना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि मोदी सरकार पिछड़े वर्गों की महिलाओं को जातिगत आधार पर मिलने वाले इस आरक्षण के लाभ से वंचित रखना चाहती है।
और नया पुराने