जनकपुरधाम (नेपाल)। आस्था, इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला का संगम माना जाने वाला जानकी मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यही वह पावन स्थल है, जहां त्रेतायुग में माता सीता का स्वयंवर हुआ था और उनका विवाह भगवान राम के साथ संपन्न हुआ था।
🏛️ नौ लाख की लागत से बना भव्य मंदिर
नेपाल के जनकपुरधाम में स्थित यह मंदिर राजधानी काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। इस भव्य मंदिर का निर्माण वर्ष 1911 ईस्वी में राजपुताना की महारानी वृषभानु कुमारी द्वारा करवाया गया था। बताया जाता है कि इसके निर्माण में उस समय करीब 9 लाख रुपये खर्च हुए थे, जिसके कारण इसे ‘नौलखा मंदिर’ के नाम से भी जाना जाने लगा।
💍 विवाह मंडप की विशेष मान्यता
मंदिर परिसर में स्थित विवाह मंडप को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। इस मंडप के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां दर्शन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और सुहाग की आयु लंबी होती है।
इतना ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों के लोग अपने विवाह के अवसर पर यहां से सिंदूर लेकर जाते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
🎶 54 वर्षों से लगातार गूंज रहा अखंड कीर्तन
जानकी मंदिर की एक और विशेषता इसकी अखंड भक्ति परंपरा है। यहां वर्ष 1967 से निरंतर भगवान राम और माता सीता के नाम का जाप तथा अखंड कीर्तन चलता आ रहा है। बीते 50 से अधिक वर्षों से बिना रुके चल रही यह परंपरा भक्तों की आस्था का प्रतीक बन चुकी है।
🌸 माता सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बैसाख माह की नवमी तिथि को मिथिला के राजा जनक के यहां माता सीता का जन्म हुआ था। उनकी राजधानी जनकपुर ही थी, जो आज जनकपुर के रूप में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह स्थान हिंदू धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।
🎨 अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व
सफेद संगमरमर जैसी आभा, राजस्थानी और मुगल शैली के मिश्रण से बनी इस मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक है। बारीक नक्काशी, रंगीन कांच और मिथिला कला की झलक इसे और भी भव्य बनाती है।
माता सीता को समर्पित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है—जहां उनका जन्म हुआ और विवाह के बाद यह स्थान भगवान राम का ससुराल माना गया।
👉 कुल मिलाकर, जानकी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
Tags:
National



