Lakhisarai: अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस पर पर्यावरण भारती ने किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

लखीसराय/बिहार, 11 जून 2026। अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गुरुवार को लखीसराय के कार्यानंदनगर स्थित बिजली कार्यालय के समीप पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यावरण भारती द्वारा देव वृक्ष पीपल का पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रख्यात पर्यावरणविद् दीपक कुमार भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि वर्तमान समय में मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वृक्षों की लगातार कटाई, पहाड़ों को विस्फोटकों के माध्यम से तोड़ना तथा नदियों से अत्यधिक मात्रा में बालू का खनन प्रकृति के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका प्रभाव केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2026 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे वहां के लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा और कई दशक पुराने तापमान के रिकॉर्ड टूट गए। वहीं भारत के उत्तर प्रदेश स्थित बांदा जिले में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में फिलीपींस में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक असंतुलन के कारण दुनिया भर में आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ती जा रही है, जिससे मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

राम बिलास शाण्डिल्य ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्राचीन काल में लोग वर्षा जल के संचयन के लिए तालाबों, पोखरों और कुओं का निर्माण कराते थे। इससे भूजल स्तर संतुलित रहता था तथा जल संकट की समस्या उत्पन्न नहीं होती थी। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण हो गया है और अनेक कुएं कचरे से भर दिए गए हैं। वर्तमान समय में लोग केवल बोरिंग के माध्यम से भूजल का दोहन कर रहे हैं, जबकि वर्षा जल के संरक्षण की दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, संस्थान और भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित करे। करोड़ों रुपये खर्च कर भवन निर्माण करने वाले लोगों को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए। इससे न केवल जल संरक्षण होगा बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि "जल है तो कल है" केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का आधार है।

अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पहली बार 11 जून 2024 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना तथा खेल को उनके मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करना है। आधुनिक विज्ञान और तकनीक के दौर में जहां बच्चे मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, वहीं खेल गतिविधियां उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वक्ताओं ने कहा कि खेल बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करते हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस जैसे अवसरों पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन समाज को दोहरा संदेश देता है—एक ओर स्वस्थ शरीर के लिए खेल आवश्यक हैं, वहीं स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण भी उतना ही जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। पौधारोपण कार्यक्रम में अद्वैत सिंहदेव, अद्विता, दीपक कुमार भारद्वाज, रवि कुमार भारद्वाज, अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, राम बिलास शाण्डिल्य सहित कई पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
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