पटना/बिहार। पटना उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ अंचलाधिकारी (सीओ) की रिपोर्ट के आधार पर किसी भी जमाबंदी को रद्द नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि जमाबंदी निरस्त करने की प्रक्रिया विधिसम्मत होनी चाहिए और केवल प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर ऐसा निर्णय लेना न्यायसंगत नहीं है।
न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी जमाबंदी की वैधता या स्वामित्व को लेकर असंतुष्ट है, तो उसे कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत सक्षम दीवानी न्यायालय (सिविल कोर्ट) में स्वामित्व संबंधी वाद दायर करना होगा।
विधिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों का समाधान विधिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना आवश्यक है और केवल प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर जमाबंदी रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता।
भूमि विवादों से जुड़े मामलों में अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय भूमि एवं जमाबंदी से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों का अंतिम समाधान सक्षम न्यायालय के माध्यम से ही किया जाना चाहिए तथा प्रशासनिक कार्रवाई भी कानून के निर्धारित दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए।
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