वाराणसी/उत्तर प्रदेश। मातृ दिवस के पावन अवसर पर वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित राजकीय वृद्धाश्रम में उस समय भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला, जब “खुशी की उड़ान” संस्था के सदस्यों ने वहां रह रही वृद्ध माताओं के साथ दिन बिताकर उनके जीवन में खुशियों के रंग भरने का प्रयास किया। कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम का वातावरण प्रेम, सम्मान और आत्मीयता से सराबोर हो उठा। संस्था के इस मानवीय पहल ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
“खुशी की उड़ान” संस्था द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य उन माताओं को अपनापन और सम्मान का एहसास कराना था, जो अपने जीवन के इस पड़ाव में अपनों के स्नेह और साथ की प्रतीक्षा कर रही हैं। संस्था के सदस्यों ने वृद्ध माताओं के साथ समय बिताया, उनसे आत्मीय संवाद किया और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की हर संभव कोशिश की।
कार्यक्रम के दौरान संस्था की टीम ने गीत-संगीत, नृत्य, हंसी-मजाक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ऐसा पारिवारिक माहौल तैयार किया कि वृद्धाश्रम खुशियों से गूंज उठा। कई माताएं इस स्नेह और सम्मान को पाकर भावुक हो गईं। उनकी आंखों में खुशी और अपनापन साफ झलक रहा था। संस्था के सदस्यों ने माताओं को उपहार भेंट कर उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
इस अवसर पर “खुशी की उड़ान” संस्था की संस्थापिका सारिका दुबे ने कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और ममता की सबसे बड़ी मिसाल होती हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में रह रही माताओं के चेहरे पर मुस्कान देखना संस्था के लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।
उन्होंने कहा,
“मां जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। उनका सम्मान और सेवा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। हमारा प्रयास है कि कोई भी मां खुद को अकेला महसूस न करे। समाज के हर व्यक्ति को आगे आकर वृद्ध माताओं के सम्मान और सहयोग के लिए काम करना चाहिए।”
कार्यक्रम में संस्था के सदस्य रितेश मिश्रा, आहिल खान, रिया, प्रेमलता, प्रीति, शीतांशु, मोहित, सागर, हिमांशु, मुस्कान साहू, आशीष जायसवाल, पूनम जायसवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। वहीं बाबा जी की फ्री पाठशाला से राजीव टंडन एवं आरती टंडन ने भी अपनी सहभागिता निभाई। सभी सदस्यों ने वृद्ध माताओं के साथ आत्मीयता से समय बिताकर मातृ दिवस को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में वृद्धाश्रम की माताओं ने संस्था के इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि लंबे समय बाद उन्हें परिवार जैसा स्नेह और अपनापन महसूस हुआ। संस्था द्वारा किए गए इस संवेदनशील एवं प्रेरणादायी कार्य की स्थानीय लोगों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भी जमकर सराहना की जा रही है।
मातृ दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशीलता, सेवा और मानवीय मूल्यों का संदेश देने वाला प्रेरणादायी प्रयास बन गया।
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