मधुबनी/बिहार। भारत और नेपाल के बीच बेहतर सीमा प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से नेपाल के जनकपुर में भारत-नेपाल द्विपक्षीय फील्ड सर्वे टीम (एफएसटी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े प्रशासनिक, पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और अंतरराष्ट्रीय सीमा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान भारत-नेपाल सीमा पर स्थित क्षतिग्रस्त एवं जर्जर हो चुके बॉर्डर पिलरों की स्थिति की समीक्षा की गई। दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा चिह्नों को सुरक्षित एवं स्पष्ट बनाए रखने के लिए क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत, आवश्यक स्थानों पर नए अतिरिक्त पिलरों के निर्माण तथा छोटे पिलरों की ऊंचाई बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। अधिकारियों ने कहा कि सीमा स्तंभों का स्पष्ट एवं सुरक्षित होना सीमा प्रबंधन, निगरानी और दोनों देशों के नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में विशेष रूप से बिहार के मधुबनी जिले से सटी लगभग 135 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूद बॉर्डर पिलरों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। इस दौरान कई ऐसे पिलरों की पहचान की गई जो समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गए हैं या विभिन्न कारणों से लापता हो चुके हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इन गुम एवं क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्स्थापन और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने पर बल दिया।
अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में आपसी समन्वय, सुरक्षा व्यवस्था, सीमा विवादों के त्वरित समाधान तथा अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए नियमित संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सीमा संबंधी तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां आपसी सहयोग और समन्वय के साथ कार्य करेंगी।
भारत और नेपाल के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक को सीमा क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और बेहतर द्विपक्षीय संबंधों की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस तरह की नियमित बैठकों से दोनों देशों के बीच सहयोग और अधिक मजबूत होगा तथा सीमा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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