पटना/बिहार। बिहार सरकार ने राज्य में सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक मूल्यों और सार्वजनिक शिष्टाचार को बनाए रखने के उद्देश्य से अश्लील, द्विअर्थी तथा जातिसूचक भावनाओं को भड़काने वाले गीतों के प्रसारण पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार द्वारा गृह विभाग को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही राज्य के सभी जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
16 जून 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, वाहनों, विवाह समारोहों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अश्लील, द्विअर्थी और जातीय भावनाओं को भड़काने वाले गीत खुलेआम बजाए जा रहे हैं। इन गीतों के कारण समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द की भावना कमजोर हो रही है तथा अश्लीलता, हिंसा, कटुता, वैमनस्य और सामाजिक अशांति जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल रहा है।
पत्र में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई है कि ऐसे गीतों का नकारात्मक प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। इससे समाज का सांस्कृतिक वातावरण दूषित हो रहा है और आम लोग सार्वजनिक स्थानों पर असहज महसूस कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रकार के गीत न केवल सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और सार्वजनिक मर्यादा की दृष्टि से भी अनुचित हैं।
कला एवं संस्कृति विभाग ने अपने पत्र में बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक भाषाओं की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को अश्लील और भड़काऊ सामग्री से बचाना आवश्यक है। विभाग ने इसे एक गंभीर और ज्वलंत सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि इसका दुष्प्रभाव पूरे समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है।
सरकार के निर्देश के बाद अब जिला प्रशासन और पुलिस महकमे को सार्वजनिक स्थलों, आयोजनों, डीजे, वाहनों तथा अन्य माध्यमों से बजाए जाने वाले अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गीतों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ऐसे गीतों के प्रसारण पर निगरानी और कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा सकता है।
राज्य सरकार के इस कदम को सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना है।
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