सारण/बिहार। जिले के सोनपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरी बुजुर्ग गांव में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने एवं किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न तकनीकों एवं लाभों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि किसानों की उत्पादन लागत को भी काफी हद तक कम करती है।
कार्यशाला में किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, प्राकृतिक कीट प्रबंधन, जैविक उर्वरकों के उपयोग तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है और उनकी आय में वृद्धि संभव है।
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा खेती से जुड़ी नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। अधिकारियों ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने और अपने अनुभव अन्य किसानों तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम में सोनपुर के विधायक विनय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास के लिए प्राकृतिक खेती एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यशाला के अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम को किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।
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