जमुई/बिहार। गर्भावस्था के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श और संतुलित आहार सुरक्षित मातृत्व की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। यह बातें जमुई की जानी-मानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी ने गर्भवती महिलाओं को जागरूक करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को अपनी संभावित प्रसव तिथि (डिलीवरी डेट) से कम से कम 10 दिन पहले अपने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से अवश्य मिलना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर मां और गर्भस्थ शिशु की पूरी जांच कर यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रसव सामान्य रूप से होने की संभावना है या किसी प्रकार की चिकित्सकीय जटिलता तो नहीं है। यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसका समय रहते उचित इलाज और आवश्यक तैयारी की जा सकती है, जिससे प्रसव के समय अनावश्यक जोखिम से बचा जा सके।
• गर्भावस्था में पौष्टिक भोजन है बेहद जरूरी
डॉ. शालिनी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शरीर को पर्याप्त पोषण, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलना बेहद जरूरी है। यदि गर्भवती महिला शारीरिक रूप से कमजोर होगी तो प्रसव के समय उसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के अंतिम कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान डॉक्टर और मेडिकल टीम के साथ-साथ गर्भवती महिला की सक्रिय भागीदारी भी बेहद आवश्यक होती है। यदि महिला शारीरिक रूप से कमजोर होगी तो वह डॉक्टर के निर्देशों का पूरी तरह पालन और आवश्यक सहयोग नहीं कर पाएगी, जिससे प्रसव प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
• समय पर जांच और जागरूकता से बनता है सुरक्षित मातृत्व
डॉ. शालिनी ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की कि वे गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें, चिकित्सक की सलाह का पालन करें, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन लें तथा किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही देखभाल और जागरूकता से मां और नवजात दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है तथा प्रसव संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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