जहानाबाद/बिहार। राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन अभियान (एनटीईपी) के तहत बिहार के जहानाबाद जिले में टीबी मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर टीबी से जूझ रहे 200 मरीजों के बीच पोषण किट का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों को उपचार के साथ-साथ संतुलित पोषण उपलब्ध कराकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ को सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी छिरिंग वाई. भूटिया ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि समय पर जांच, नियमित दवा और उचित पोषण के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर बिना किसी झिझक के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जांच कराएं और इलाज शुरू करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों के लिए जांच, दवा, उपचार और आवश्यक परामर्श की सभी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना बेहद जरूरी है, ताकि मरीज बिना डर के इलाज करा सकें।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी के उपचार में दवाओं के साथ पौष्टिक आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी उद्देश्य से रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा पोषण किट वितरित की गई है, जिससे मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वे उपचार का बेहतर लाभ प्राप्त कर सकें।
भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी एवं स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से लोगों से आह्वान किया कि टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए। यदि किसी व्यक्ति में लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन कम होना, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी तथा बड़ी संख्या में टीबी मरीज और उनके परिजन उपस्थित रहे। सभी ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प भी लिया।
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