UP: विधान परिषद की 16 समितियों को मिले नए सभापति, विनीत सिंह को आपदा प्रबंधन समिति की कमान

2026-27 के लिए समितियों का पुनर्गठन, विधान परिषद सचिवालय ने जारी किया नियुक्ति आदेश

लखनऊ | 24 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में वर्ष 2026-27 के लिए समितियों की नई जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। कार्यकारी सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के निर्देश पर 16 समितियों के सभापतियों की नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया गया है। नई सूची में कई एमएलसी को अहम समितियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सबसे महत्वपूर्ण नियुक्तियों में एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह का नाम शामिल है। उन्हें दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति का सभापति बनाया गया है।

किस समिति की जिम्मेदारी किसे?

विधान परिषद की नई सूची के मुताबिक विभिन्न समितियों के सभापति इस प्रकार हैं—

नियम पुनरीक्षण समिति — डॉ. केपी श्रीवास्तव
विशेषाधिकार समिति — कुंवर मानवेंद्र सिंह
याचिका समिति — डॉ. सुधीर गुप्ता
आश्वासन समिति — शाहनवाज खान
वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति — प्रांशु दत्त द्विवेदी
प्रश्न एवं संदर्भ समिति — बहोरन लाल मौर्य
संसदीय अध्ययन समिति — राजबहादुर सिंह चंदेल
संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति — अनूप कुमार गुप्ता
विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, जिला पंचायत एवं नगर निगमों में अनियमितताओं संबंधी जांच समिति — जितेंद्र सिंह सेंगर
प्रदेशीय विद्युत व्यवस्था संबंधी जांच समिति — ओम प्रकाश सिंह
विनियमन समीक्षा समिति — सुभाष यदुवंश
विधायी समाधिकार समिति — मुकुल यादव
दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति — श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह
शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति — ऋषिपाल सिंह
खाद्य पदार्थों में मिलावट एवं नकली दवाओं की रोकथाम संबंधी समिति — विजय शिवहरे

बारिश-बाढ़ के बीच अहम होगी जिम्मेदारी

दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सभापति के तौर पर विनीत सिंह के सामने प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े मामलों की समीक्षा की जिम्मेदारी होगी। बाढ़, अतिवृष्टि, सूखा और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के दौरान राहत-बचाव और प्रशासनिक तैयारियों से जुड़े विषय समिति के दायरे में आ सकते हैं।

इस समय प्रदेश के कई इलाकों में बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए समिति की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जनहित के मुद्दों पर निगाह

समितियों का गठन विधान परिषद की कार्यप्रणाली में अहम भूमिका निभाता है। अब नई जिम्मेदारियों के साथ इन समितियों की आगामी बैठकों और जनहित से जुड़े मामलों की समीक्षा पर सभी की नजर रहेगी। खासतौर पर आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक अनियमितताओं, बिजली व्यवस्था, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
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