बाबा विश्वनाथ पहुंचे ससुराल, 501 पार्थिव शिवलिंगों का हुआ सामूहिक महाभिषेक; 51 डमरुओं की थाप ने बांधा समां
वाराणसी | सारनाथ
सारनाथ में मंगलवार को आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। बाबा विश्वनाथ के चंद्रमौलीश्वर स्वरूप की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। सपरिवार सुसज्जित पालकी में विराजमान महादेव जब सारनाथ की सड़कों से गुजरे तो हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। शंख, शहनाई और डमरुओं की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने जगह-जगह बाबा के दर्शन कर पुष्प अर्पित किए।
संकटमोचन मंदिर से शुरू हुई पालकी यात्रा
सारनाथ के गंज क्षेत्र स्थित संकटमोचन मंदिर से दोपहर करीब तीन बजे यात्रा का शुभारंभ हुआ। इससे पहले शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने चंद्रमौलीश्वर का विधिवत श्रृंगार, पूजन और महाआरती कराई।
पूजन के बाद काशी विश्वनाथ डमरू दल के मोनू बाबा के नेतृत्व में 51 डमरुओं की गूंज के साथ पालकी यात्रा आगे बढ़ी। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही और लोगों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
जैन और बौद्ध विरासत के बीच दिखी शिवभक्ति
पालकी यात्रा म्यूजियम मार्ग से होते हुए भगवान श्रेयांशनाथ की जन्मस्थली, चाइना मंदिर और मूलगंध कुटी विहार की ओर पहुंची। सारनाथ की धरती पर इस दौरान सनातन, जैन और बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।
सारंगनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान
सारंगनाथ मंदिर पहुंचने पर चंद्रमौलीश्वर का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया गया। प्रदोष काल में बाबा को झूले पर विराजमान कराया गया। इसके बाद 501 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर सामूहिक महाभिषेक कराया गया।
पंचतीर्थ और पंचकूप के पवित्र जल में सर्वौषधि मिलाकर शिवलिंगों का अभिषेक किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने।
विदेशों से भी पहुंचे श्रद्धालु
आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। अमेरिका से राजेश कुमार श्रीवास्तव और आयरलैंड से सुरेश चंद्र पाठक समेत दिल्ली, बिहार, गाजीपुर और सिद्धार्थनगर से श्रद्धालु पहुंचे।
कार्यक्रम में सुधीरानन्द जी महाराज, राहुल सिन्हा, टिप्पु पाण्डेय, गजेंद्र सिंह, भावना सिंह और साधना जी का भी विशेष योगदान रहा।
सारनाथ में दिखी काशी की धार्मिक संस्कृति
चंद्रमौलीश्वर की पालकी यात्रा ने सारनाथ की शाम को भक्तिमय बना दिया। डमरुओं की थाप और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच निकली यात्रा ने काशी की उस परंपरा को जीवंत कर दिया, जिसमें अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक धाराएं एक-दूसरे के सम्मान के साथ आगे बढ़ती हैं।
सारनाथ में बाबा विश्वनाथ के चंद्रमौलीश्वर स्वरूप के आगमन का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से भरा यादगार पल बन गया।
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