चेक बाउंस, वैवाहिक विवाद, भूमि और दुर्घटना से जुड़े मामलों में सुलह की कोशिश, ADR सेंटर में होगी प्रक्रिया
वाराणसी | 24 अगस्त 2026
अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों को आपसी सहमति से खत्म कराने के लिए वाराणसी में ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ के तहत विशेष पहल की जा रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से संचालित इस अभियान में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें दोनों पक्ष बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाल सकते हैं।
1 अगस्त 2026 से शुरू हुए इस अभियान का मकसद पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत दिलाने के साथ समय और मुकदमेबाजी में होने वाले खर्च को कम करना है।
किन विवादों में हो सकती है मध्यस्थता?
अभियान के तहत समझौते योग्य मामलों को मध्यस्थता के लिए लिया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से पति-पत्नी के विवाद, घरेलू हिंसा से जुड़े मामले, मोटर दुर्घटना दावे, चेक बाउंस, व्यावसायिक विवाद, उपभोक्ता मामले, भूमि अधिकरण से जुड़े प्रकरण, सेवा विवाद और ऋण वसूली शामिल हैं।
इसके अलावा शमनीय आपराधिक मामलों, बेदखली से जुड़े विवादों और अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों में भी सुलह की संभावना तलाश की जाएगी।
अदालत परिसर में ही मिलेगा समाधान का मंच
मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया जनपद न्यायालय वाराणसी परिसर के एडीआर सेंटर स्थित मीडिएशन हॉल में कराई जाएगी। यहां पक्षकारों को अपनी बात रखने और आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राजीव मुकुल पाण्डेय ने बताया कि अभियान के जरिए वादकारियों को अपने उपयुक्त मामलों का शांतिपूर्ण ढंग से निस्तारण कराने का अवसर दिया जा रहा है।
समय और खर्च दोनों बचाने का प्रयास
मध्यस्थता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि विवाद का समाधान पक्षकारों की सहमति से तलाश किया जाता है। ऐसे मामलों में जहां दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों, यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक कार्रवाई से बचने में मददगार हो सकती है।
अभियान के जरिए न केवल लंबित मामलों के निस्तारण को गति देने की कोशिश है, बल्कि पक्षकारों के बीच विवाद को बातचीत के माध्यम से खत्म करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उपयुक्त मामलों और प्रक्रिया की जानकारी के लिए वादकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, वाराणसी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
मध्यस्थता अभियान 3.0 के जरिए वाराणसी में कोशिश है कि जहां विवाद का हल बातचीत से संभव है, वहां अदालत की लंबी प्रक्रिया के बजाय सुलह-समझौते से न्याय का रास्ता आसान बनाया जाए।
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