Bihar : श्रावणी मेले में कांवरियों का सहारा बनी ‘जीविका दीदी की रसोई’, शुद्ध भोजन के साथ सेवा का संकल्प

भागलपुर/मुंगेर, 17 अगस्त। श्रावणी मेला 2026 में बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले लाखों कांवरियों के लिए बिहार सरकार की पहल ‘जीविका दीदी की रसोई’ राहत और भरोसे का केंद्र बन रही है। लंबी और कठिन कांवर यात्रा के बीच श्रद्धालुओं को यहां स्वच्छ, सात्विक, पौष्टिक और उचित दर पर घर जैसा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

खास बात यह है कि इन रसोइयों का संचालन जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वयं कर रही हैं। इससे जहां कांवरियों को भोजन की सुविधा मिल रही है, वहीं जीविका दीदियों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है।

मुंगेर में सात स्थानों पर रसोई

मुंगेर जिले से गुजरने वाले करीब 26 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवरिया पथ पर इस बार सात स्थानों पर ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू की गई है। सभी रसोइयों को टेंट सिटी के बाहर स्थापित किया गया है, ताकि कांवरियों को यात्रा के दौरान आसानी से भोजन मिल सके। यहां भोजन के अलावा दूध, फल, पेयजल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंबी यात्रा के दौरान शुद्ध और सात्विक भोजन बड़ी जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जीविका समूह की महिलाओं को रसोई संचालन की जिम्मेदारी दी है।

सेवा को मानती हैं सौभाग्य

जीविका दीदी बेबी ने बताया कि रसोई में कांवरियों के लिए ताजा और सात्विक भोजन तैयार किया जा रहा है। उनके लिए श्रद्धालुओं की सेवा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि बाबा के भक्तों की सेवा करने का सौभाग्य है। उनका प्रयास है कि कांवरिया भोजन करने के बाद संतुष्ट होकर अपनी आगे की यात्रा पर रवाना हों।

जीविका दीदी राजनन्दिनी देवी ने बताया कि भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा निर्धारित उचित दर पर ही भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण भोजन के लिए अधिक कीमत नहीं चुकानी पड़े।

सामुदायिक रसोई का अनुभव आ रहा काम

जीविका दीदियों को सामुदायिक रसोई और भोजन प्रबंधन का पहले से अनुभव है। बिहार के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को भोजन उपलब्ध कराने में जीविका समूहों की महिलाएं जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। अब इसी अनुभव का लाभ श्रावणी मेले में कांवरियों को मिल रहा है।

बांका और भागलपुर में भी सुविधा

मुंगेर के अलावा बांका और भागलपुर में भी ‘दीदी की रसोई’ श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बनी हुई है। बांका जिले में तीन रसोइयां संचालित हैं, जहां अब तक आठ लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है। वहीं भागलपुर जिले में कांवरिया पथ के करीब 11 किलोमीटर क्षेत्र में तीन दीदी की रसोई संचालित हैं। यहां जीविका दीदियों द्वारा अब तक करीब 12 लाख रुपये का कारोबार किया गया है।

कांवरियों ने भी जताई संतुष्टि

कांवरिया विशेश्वर ने बताया कि लंबी पैदल यात्रा के बीच इस तरह की रसोई से काफी सुविधा मिल रही है। यहां भोजन साफ-सुथरा, स्वादिष्ट और सात्विक है तथा कीमत भी उचित है।

एक अन्य कांवरिया ने कहा कि यात्रा के दौरान शुद्ध भोजन की सबसे अधिक जरूरत होती है। ‘जीविका दीदी की रसोई’ में घर जैसा भोजन मिलने से भूख मिटने के साथ आगे की यात्रा के लिए ऊर्जा भी मिल रही है।

श्रावणी मेले में प्रशासन सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटा है। वहीं, ‘जीविका दीदी की रसोई’ सेवा, रोजगार और महिला सशक्तीकरण का उदाहरण बनकर सामने आई है। शुद्ध भोजन, उचित मूल्य और सेवा भाव के साथ संचालित ये रसोइयां कांवरियों की यात्रा को सहज बनाने के साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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