जमुई/बिहार। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्षों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई को लेकर पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं। सिकंदरा के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए संगठन में जवाबदेही के समान सिद्धांत को लागू करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि यदि दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की रैली में शामिल नहीं होने के कारण जिला अध्यक्षों पर कार्रवाई की जा रही है, तो प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से भी जवाब मांगा जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जारी किया कार्यालय आदेश
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार, पूर्व विधायक की ओर से 7 नवंबर 2026 को पत्रांक 248 के तहत कार्यालय आदेश जारी किया गया है। इसमें दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ रैली’ में शामिल नहीं होने वाले जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश में कहा गया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद पार्टी के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद भी संबंधित जिला अध्यक्ष रैली में शामिल नहीं हुए। इसे संगठनात्मक निर्देशों की अवहेलना मानते हुए उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
कार्यालय आदेश में निलंबित जिला अध्यक्षों को आगे की कार्रवाई और भविष्य की जिम्मेदारियों पर चर्चा के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं बिहार कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने का निर्देश भी दिया गया है। आदेश की प्रतिलिपि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू तथा सह-प्रभारी सचिवों को भी भेजी गई है।
बंटी चौधरी ने प्रदेश पदाधिकारियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सिकंदरा के पूर्व विधायक सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी ने कहा कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कार्रवाई के नाम पर केवल जिला अध्यक्षों को निशाना बनाना उचित नहीं है। यदि दिल्ली की रैली में शामिल नहीं होने को कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है, तो संगठन सृजन के माध्यम से नियुक्त प्रदेश उपाध्यक्षों, महासचिवों और सचिवों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठन में पद और जिम्मेदारी लेने वाले सभी पदाधिकारियों की जवाबदेही समान होनी चाहिए। जो लोग बड़े-बड़े संगठनात्मक पदों पर बैठे हैं, लेकिन दिल्ली की रैली में अपनी उपस्थिति तक दर्ज नहीं करा सके, उनसे भी जवाब मांगा जाना चाहिए।
निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, संगठन में दोहरे मापदंड पर आपत्ति
बंटी चौधरी ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि संगठनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन वह निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए। केवल जिला अध्यक्षों पर कार्रवाई कर अन्य पदाधिकारियों को इससे अलग रखना दोहरे मापदंड जैसा होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन की जिम्मेदारी जब सभी पदाधिकारियों की है, तो जवाबदेही भी सभी की होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी निभाने में चूक हुई है तो संबंधित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए।
बिहार कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के निलंबन के बाद उठे इस सवाल ने संगठनात्मक अनुशासन, नेतृत्व की जवाबदेही और प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियों के समान बंटवारे को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि प्रदेश नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।
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