नई दिल्ली, 22 अगस्त 2022। मानव शरीर का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है। ऐसे में पानी पीना केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर की हर कोशिका, अंग और प्रक्रिया के लिए ईंधन का काम करता है। फिर भी, कई बार लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते या गलत तरीके से पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, थकान, पाचन संबंधी समस्या और त्वचा की परेशानियाँ हो सकती हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने हाल ही में पांच सरल और व्यवहारिक “ड्रिंकिंग टिप्स” साझा किए हैं। ये न केवल बेहतर हाइड्रेशन सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आयुर्वेदिक सिद्धांतों और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान दोनों पर आधारित हैं। अच्छी बात यह है कि ये सुझाव रोजमर्रा की जीवनशैली में बिना किसी कठिनाई के अपनाए जा सकते हैं।
1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और पेशाब के रंग पर ध्यान दें
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग तब तक पानी नहीं पीते, जब तक उन्हें प्यास न लगे। लेकिन यह आदत शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अपने हाइड्रेशन स्तर की पहचान करने का सबसे आसान तरीका है पेशाब के रंग को देखना।
अगर मूत्र हल्का पीला या लगभग साफ है, तो शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड है।
गाढ़ा पीला रंग डिहाइड्रेशन का संकेत देता है और तुरंत पानी पीने की आवश्यकता बताता है।
नियमित और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से न केवल पाचन क्रिया सुचारू रहती है, बल्कि त्वचा पर निखार आता है, थकान दूर होती है और शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
2. हमेशा स्वच्छ और शुद्ध पानी चुनें
आज के दौर में प्रदूषण और जलजनित रोगों के खतरे को देखते हुए साफ पानी पीना बेहद जरूरी है। यदि पानी की शुद्धता को लेकर संदेह हो, तो उबला हुआ पानी पीना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
आयुर्वेद के अनुसार, उबला हुआ और गुनगुना पानी शरीर के लिए अधिक सुपाच्य होता है। यह पेट की बीमारियों, संक्रमण और टॉक्सिन्स से बचाव करता है।
3. दूध को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
आयुष मंत्रालय प्रतिदिन लगभग 250 मिलीलीटर उबला हुआ या पाश्चुरीकृत दूध पीने की सलाह देता है। दूध में मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी हड्डियों को मजबूत करते हैं, मांसपेशियों को ऊर्जा देते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित रखते हैं।
आयुर्वेद में दूध को “संपूर्ण आहार” कहा गया है, क्योंकि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
4. कोल्ड ड्रिंक्स छोड़ें, ताजे फलों का रस अपनाएं
शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स शरीर को तात्कालिक स्फूर्ति तो देते हैं, लेकिन लंबे समय में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। इसके बजाय ताजे फलों का रस, नारियल पानी और नींबू पानी जैसे प्राकृतिक विकल्प चुनें। ये न केवल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं।
5. प्यास का इंतजार न करें, शरीर की सुनें
अक्सर लोग व्यस्त जीवनशैली में प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गलत आदत है। प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर पहले ही डिहाइड्रेशन की ओर बढ़ रहा है। इसलिए नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे घूंटों में पानी पीने की आदत डालें। यह न केवल हाइड्रेशन बनाए रखता है, बल्कि पाचन तंत्र, मानसिक एकाग्रता और कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाता है।
पानी पीना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही ढंग से पीना और सही पेय पदार्थों का चुनाव करना। आयुष मंत्रालय के बताए ये पांच टिप्स जीवनशैली में छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। साफ पानी, दूध और प्राकृतिक पेय अपनाकर और कोल्ड ड्रिंक जैसी आदतों को त्यागकर हम न केवल बेहतर हाइड्रेशन पा सकते हैं, बल्कि अपनी सेहत, ऊर्जा और आयुर्वेदिक संतुलन को भी मजबूत कर सकते हैं।
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