जमुई/बिहार। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल कर पूरे देश के सामने एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। जल संकट जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत और ठोस प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए किसी “संजीवनी” से कम नहीं हैं। यह बातें जनता दल यूनाइटेड अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पासवान ने कही।
राकेश पासवान ने कहा कि बिहार आज “संरक्षण भी, समाधान भी” के मूल मंत्र के साथ जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है और स्थाई समाधान प्रस्तुत करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परंपरागत जल संरचनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जल संरक्षण को एक व्यापक अभियान का रूप दिया है।
उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने राज्यभर में 1.40 लाख से अधिक पुराने जलस्रोतों, जैसे तालाब, आहर और पइन का कायाकल्प किया है। इन जलस्रोतों के पुनर्जीवन से न केवल भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों को पर्याप्त जल उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है। यह पहल सूखे और बाढ़ दोनों स्थितियों से निपटने में सहायक सिद्ध हो रही है।
प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पासवान ने आगे कहा कि सरकार केवल वर्तमान की समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ठोस रणनीति पर काम कर रही है। इसी सोच के तहत राज्य में 73 हजार से अधिक नए जलस्रोतों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधन केवल विकास के साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं, और इन्हें संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीति, नीयत और निरंतरता की सराहना करते हुए कहा कि यही कारण है कि बिहार आज जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। चेकडैम, पारंपरिक जल संरचनाओं और वर्षा जल संचयन के प्रभावी संरक्षण से पर्यावरण संतुलन भी बना हुआ है।
राकेश पासवान ने कहा कि जल संरक्षण अब बिहार में केवल एक नारा भर नहीं, बल्कि एक सतत और जनसहभागिता आधारित अभियान बन चुका है। इन प्रयासों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव राज्य की कृषि व्यवस्था, सिंचाई सुविधा और पेयजल आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार जल आत्मनिर्भरता की दिशा में और भी मजबूत स्थिति में पहुंचेगा तथा अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
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