वाराणसी/उत्तर प्रदेश। कड़ाके की ठंड जहां संपन्न वर्ग के लिए सुकून और आनंद का मौसम बन जाती है, वहीं फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों और खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने वाले अभावग्रस्त लोगों के लिए यह मौसम किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होता। हर वर्ष तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद ठंड से होने वाली मौतों की खबरें समाज की संवेदनाओं को झकझोर देती हैं। ऐसे में मानवता की मिसाल पेश करते हुए सामाजिक संस्था “खुशी की उड़ान” ने अपनी सेवा मुहिम “ओढ़ा दो जिंदगी” के तहत हाड़कंपाती ठंड में जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कर उन्हें राहत पहुंचाई।
संस्था द्वारा यह सेवा कार्य वाराणसी रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आसपास के इलाकों में देर रात तक चलाया गया। इस दौरान सड़क किनारे सोने वाले बेसहारा बुजुर्गों, दिव्यांगों, रिक्शा चालकों, भिक्षावृत्ति कर जीवन यापन करने वालों तथा माघ मेला और कुम्भ स्नान के लिए आने वाले ऐसे यात्रियों को कंबल वितरित किए गए, जिन्हें ट्रेन न मिलने के कारण ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही थी। संस्था की टीम ने अंधेरी रात में ठंड से कांपते बच्चों और निराश्रितों को ढूंढ-ढूंढ कर उनके कंधों पर कंबल ओढ़ाया, जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके।
रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षा गार्डों ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में जहां युवाओं की संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं “खुशी की उड़ान” के युवा और महिला टीम इस धारणा को गलत साबित कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में आधी रात को निकलकर जरूरतमंदों तक पहुंचना और उन्हें स्वयं जाकर कंबल ओढ़ाना वास्तव में हृदयस्पर्शी और प्रेरणादायक दृश्य है। उन्होंने कहा कि कुंभ और माघ मेला में जाने वाले कई ऐसे यात्री होते हैं, जिन्हें ट्रेन न मिलने की स्थिति में स्टेशन पर ही रात बितानी पड़ती है, ऐसे में यह कंबल उनके लिए जीवन रक्षक साबित होंगे।
संस्था पिछले कई वर्षों से हर सर्दी के मौसम में जरूरतमंद बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के बीच गर्म कपड़े और कंबल वितरण का कार्य करती आ रही है। इस क्रम में इस वर्ष भी सेवा भावना के साथ यह अभियान चलाया गया।
संस्था की संस्थापिका सारिका दुबे ने कहा कि “खुशी की उड़ान” का यह सेवा कार्य और मुहिम ‘ओढ़ा दो जिंदगी’ निरंतर चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास है कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाई जाए। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह संस्था को और अधिक सामर्थ्य प्रदान करें, ताकि जरूरतमंदों की सेवा और व्यापक स्तर पर की जा सके।
वहीं संस्था के वरिष्ठ सदस्य प्रदीप जायसवाल ने कहा कि जरूरतमंदों को कंबल देने के बाद उनके चेहरे पर आई मुस्कान और उनके द्वारा दिए गए आशीर्वाद से आत्मिक सुख की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे पुनीत और मानवीय कार्य संस्था द्वारा आगे भी निरंतर किए जाते रहेंगे।
इस सेवा अभियान में संस्था के कोषाध्यक्ष चीतेश्वर सेठ, आकाश पांडेय, राहुल पांडेय सहित अन्य सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर जरूरतमंदों को “कंबल का संबल” ओढ़ाकर मानवता और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।
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