पटना/बिहार। अमेरिका-वेनेजुएला एवं अमेरिका-ग्रीन लैंड विवाद के बीच शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दर्द छलका है जहाँ उन्होंने खुद को इसके योग्य बताया है, फिर भी नहीं दिये जाने को लेकर नॉर्वे को जिम्मेदार और उसकी भूल बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्होंने अकेले दम पर अलग-अलग देशों से बातचीत कर उन पर दवाब बनाकर विश्व के आठ महत्वपूर्ण युद्धों को रोका है। फिर भी उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाना नॉर्वे की बेवकूफी है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि कितनी अजीब और विपरीत बात है कि अशांति के बादशाह ट्रम्प भी शांति का नोबेल पुरस्कार चाहते हैं। उन्होंने इसे ही शांति की ताकत बताया, इसे अहिंसा और गाँधी की ताकत बताया। भारत, भारतीय समाज और भारतीय धर्मों की ताकत बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी समाज में द्वेष और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म के मूल स्वभाव के भी खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा द्वारा चलाये जा रहे "समाज में द्वेष-हिंसा बढ़ाओ अभियान" को रोका नहीं गया तो जल्द ही यह अभियान खुद उनके ही खिलाफ मुड़ जाने वाला है।
धनंजय ने कहा कि यही हाल अमेरिका में भी होगा, जब हिंसा के पक्षधर ट्रम्प द्वारा चलाये जा रहे "हिंसक कुचक्र" खुद उनके ही खिलाफ खड़े हो जायेंगे क्योंकि यही प्रकृति का नियम है, और प्रकृति अपने नियमों से ही चलती है। उसे किसी ट्रम्प और मोदी के नियमों की रत्तीभर परवाह नहीं होती।
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