Jamui: ललिता कला एकेडेमी में शिक्षाविद् ललिता सिंह को नम आंखों से दी गई श्रद्धांजलि

जमुई/बिहार। शुक्रवार को शहर स्थित ललिता कला एकेडेमी परिसर में एक भावपूर्ण शोक सभा का आयोजन किया गया, जहां शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित शख्सियत, पूर्व प्रधानाध्यापिका एवं राजकीय विशिष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित स्व. ललिता सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार, कन्या मध्य विद्यालय मलयपुर की पूर्व प्रधानाध्यापिका ललिता सिंह का 26 जनवरी को मलयपुर स्थित उनके आवास पर हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया था। वे 90 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार 27 जनवरी को पूरे सम्मान एवं पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

शोक सभा के दौरान परिजनों, ग्रामीणों, शिक्षकों, शिक्षिकाओं तथा कन्या मध्य विद्यालय की छात्राओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि श्रीमती ललिता सिंह ने अपने 39 वर्षों के सेवाकाल में कन्या मध्य विद्यालय मलयपुर में शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया। वे एक प्रतिष्ठित, प्रसिद्ध और विशिष्ट शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं।

श्रीमती सिंह का जीवन शिक्षा के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने ग्रामीण अंचल में शिक्षा की अलख जगाने के लिए घर-घर जाकर लोगों को पढ़ाई के महत्व से अवगत कराया। बच्चे हों या बड़े-बुजुर्ग, महिला हों या पुरुष, हर वर्ग के लोगों को उन्होंने शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया। उनके स्नेहिल स्वभाव और समर्पण के कारण ग्रामीण उन्हें सम्मानपूर्वक “दीदी जी” कहकर संबोधित करते थे। वे न केवल शिक्षिका थीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा स्रोत भी थीं।

अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं, जिसमें दो पुत्र, दो पुत्रवधू, दो पुत्रियां, एक दामाद, नाती-नतनी, पोता-पोती, परनाती एवं परपोती शामिल हैं। इस समय पूरा परिवार शोकाकुल है।

उल्लेखनीय है कि उनके नाम पर स्थापित “ललिता कला एकेडेमी, जमुई” का संचालन उनकी पुत्री आभा कुमारी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसी एकेडेमी में आज छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं की उपस्थिति में शोक सभा आयोजित की गई। सभी ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

सभा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि श्रीमती ललिता सिंह का योगदान शिक्षा और समाज के क्षेत्र में सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
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