आगामी आम बजट से महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार सृजन और मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद : प्रो. गौरी शंकर

जमुई/बिहार। एक फरवरी को संसद के पटल पर प्रस्तुत होने वाले आगामी आम बजट को लेकर देश की जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी क्रम में केकेएम कॉलेज, जमुई के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर पासवान ने आम बजट को लेकर जनता की अपेक्षाओं और आर्थिक परिदृश्य पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आम बजट किसी भी सरकार की नीति, नियत और जन-आकांक्षाओं का स्पष्ट प्रतिबिंब होता है। यह न केवल वर्तमान आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करता है।

प्रो. पासवान ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 आगामी आम बजट का आधार स्तंभ है और इसे बजट का “डायरेक्शन इंडिकेटर” भी कहा जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था की एक्स-रे रिपोर्ट की तरह होता है, जिसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, निवेश, कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, वैश्विक आर्थिक जोखिमों और सरकारी योजनाओं के प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आर्थिक सर्वेक्षण को “डायग्नोसिस” माना जाए तो बजट उसका “ट्रीटमेंट” है। सर्वेक्षण जहां समस्याओं की पहचान करता है, वहीं बजट उनके समाधान के लिए संसाधनों का आवंटन करता है। इसीलिए आर्थिक सर्वेक्षण को एक प्रकार का “शैडो बजट” भी कहा जाता है, जो नीति का ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करता है, हालांकि अंतिम निर्णय बजट में ही लिया जाता है।

डॉ. गौरी शंकर पासवान ने आगे कहा कि देश की आम जनता, किसान, युवा, श्रमिक और मध्यम वर्ग को इस बजट से विशेष राहत की उम्मीद है। महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार के नए अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में ठोस सुधार तथा मध्यम वर्ग के लिए कर व्यवस्था में राहत जनता की प्रमुख अपेक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि आम बजट वास्तव में जनता की उम्मीदों की कसौटी होता है और यह विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने वाला सिद्ध होना चाहिए। संतुलित, समावेशी और जनहितैषी बजट ही आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रख सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2026-27 का बजट ग्रामीण गरीब, वंचित, उपेक्षित और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने में सफल होगा।

इस अवसर पर अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक एवं अर्थविद श्री सरदार राय ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 1 फरवरी को पेश होने वाला 2026-27 का बजट वास्तव में आम आदमी और किसानों का बजट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट नीति और नियत के बीच सेतु का कार्य करे, यही लोकतंत्र की सच्ची कसौटी है। जब तक आम बजट में आम आदमी की आवाज सुनाई नहीं देगी, तब तक जन विश्वास पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकता।

श्री राय ने रेलवे बजट से जुड़ी अपेक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनता चाहती है कि रेलवे केवल आधुनिक ही नहीं, बल्कि मानवीय भी बने। रेल यात्रा में सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुविधा और किफायती किराया साथ-साथ सुनिश्चित हो। युवाओं के लिए रेलवे में बड़े पैमाने पर भर्ती, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक रेल लाइन का विस्तार, तथा यात्रा को सुरक्षित बनाना लोगों की प्रमुख मांग है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित कोच, प्लेटफॉर्म सुविधाओं का विस्तार, छोटे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और सामान्य व स्लीपर श्रेणी के किराए में बढ़ोतरी न हो, यही आम जनता की अपेक्षा है।

मध्यम वर्ग को लेकर उन्होंने कहा कि इस वर्ग को किसी विशेष रियायत से अधिक एक न्यायपूर्ण और सरल कर व्यवस्था की जरूरत है। टैक्स स्लैब में राहत और कर बोझ में कमी से ही मध्यम वर्ग को वास्तविक सुकून मिल सकता है। कुल मिलाकर जनता को उम्मीद है कि आगामी आम बजट जनहित, समावेशिता और विकास के संतुलन का सशक्त दस्तावेज साबित होगा।
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