जमुई/बिहार। यूजीसी के प्रस्तावित नए कानून के खिलाफ शुक्रवार को जमुई में सवर्ण समाज की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोगों ने भाग लिया। बैठक के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में इस कानून का कड़ा विरोध करते हुए इसे सवर्ण समाज के हितों के विरुद्ध बताया और सरकार से अविलंब इस बिल को वापस लेने की मांग की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी का यह नया कानून शिक्षा व्यवस्था, नियुक्तियों और संस्थागत स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इससे न केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ेगा, बल्कि सामाजिक संतुलन भी बिगड़ने की आशंका है। समाज के लोगों ने इसे “काला कानून” करार देते हुए कहा कि यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो आगे व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
बैठक की जानकारी देते हुए प्रवीण सिन्हा ने बताया कि विचार-विमर्श के दौरान यह महसूस किया गया कि सवर्ण समाज को अपनी बात मजबूती से रखने और अधिकारों की रक्षा के लिए एक सशक्त एवं संगठित मंच की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सर्वसम्मति से “सवर्ण स्वाभिमान मंच” के गठन की घोषणा की गई। उपस्थित सदस्यों ने मंच के गठन का स्वागत करते हुए इसे समाज की एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मंच के सफल संचालन और संगठनात्मक मजबूती के लिए अमित कुमार सिंह को संयुक्त रूप से संयोजक नियुक्त किया गया। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने उन्हें बधाई दी और संगठन के प्रति अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। अमित कुमार सिंह ने कहा कि वे समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे और यूजीसी के नए कानून के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज बुलंद की जाएगी।
बैठक में प्रकाश सिन्हा, राजेन्द्र सिंह, जमादार सिंह, विपुल सिंह, प्रभात सिन्हा, धीरज सिंह सहित बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर समाज के हित में कार्य करने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
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