भारतीय रेलवे का बड़ा कदम : गुजरात और बिहार में 648 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

नई दिल्ली, 25 मार्च: देश में रेलवे नेटवर्क को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और कुशल बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय ने गुजरात और बिहार में दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 647.58 करोड़ रुपये बताई गई है। इनका मुख्य उद्देश्य रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करना, बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और ट्रेन संचालन को अधिक सुचारू बनाना है।

गुजरात में बनेगा रेल ओवर रेल फ्लाईओवर
गुजरात में पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आने वाले कोसांबा-उमरपाड़ा सेक्शन पर एक अत्याधुनिक रेल ओवर रेल (ROR) फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 344.38 करोड़ रुपये है और इसकी लंबाई लगभग 9.20 किलोमीटर होगी।

यह सेक्शन मुंबई-वडोदरा मुख्य रेलवे लाइन का हिस्सा है, जो देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक माना जाता है। वर्तमान में इस रूट पर गेज कन्वर्जन का कार्य जारी है, जिससे यातायात में और अधिक वृद्धि की संभावना है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के चलते मुख्य लाइन से सीधे कनेक्शन देना संभव नहीं है। ऐसे में यह फ्लाईओवर एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरेगा। इसके निर्माण से सतह पर होने वाली क्रॉसिंग पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो सकेगी।

बिहार के भागलपुर में बनेगा नया रेल बाईपास
दूसरी बड़ी परियोजना बिहार के भागलपुर जिले में प्रस्तावित है, जहां 303.20 करोड़ रुपये की लागत से 13.38 किलोमीटर लंबा रेल बाईपास बनाया जाएगा। यह बाईपास गोनुधाम हॉल्ट (बराहट-भागलपुर सेक्शन) को सबौर (भागलपुर-साहिबगंज सेक्शन) से जोड़ेगा और पूर्वी रेलवे के अंतर्गत आएगा। भागलपुर जंक्शन वर्तमान में अपनी क्षमता से कहीं अधिक ट्रेनों का संचालन कर रहा है। यहां ट्रैफिक लोड 125 प्रतिशत से भी अधिक पहुंच चुका है, जिसके कारण अक्सर देरी और संचालन संबंधी समस्याएं सामने आती हैं।

नई बाईपास लाइन बनने से ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए इंजन रिवर्स करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और ट्रेन संचालन अधिक तेज और प्रभावी बन सकेगा।

यात्रियों और माल ढुलाई दोनों को होगा लाभ 
इन दोनों परियोजनाओं का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माल ढुलाई प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी। रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को गति मिलेगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा।

रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये परियोजनाएं भारतीय रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा हैं। देश में बढ़ती जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों के चलते रेलवे पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नई परियोजनाओं के माध्यम से न केवल भीड़भाड़ कम की जाएगी, बल्कि सुरक्षा और कार्यकुशलता में भी उल्लेखनीय सुधार किया जाएगा।

भविष्य के लिए मजबूत आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आने वाले वर्षों में भारत की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देंगे। बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय और सुरक्षित संचालन से रेलवे यात्रियों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बनेगा। गुजरात और बिहार में स्वीकृत ये दोनों परियोजनाएं भारतीय रेलवे की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगी। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की समग्र आर्थिक प्रगति में भी योगदान मिलेगा।
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