अमेरिका–भारत संवाद : पश्चिम एशिया के संकट पर ट्रंप और PM मोदी के बीच अहम बातचीत

नई दिल्ली, 25 मार्च। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच वैश्विक कूटनीति तेज होती नजर आ रही है। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi से महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत की। इस बातचीत को क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने मंगलवार को इस बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है और वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं।

यह टेलीफोनिक वार्ता उस समय के बाद पहली बार हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष ने व्यापक रूप ले लिया है। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने विशेष रूप से Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई इस बातचीत में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और समुद्री मार्गों को खुला रखने पर विशेष बल दिया गया।

वर्तमान में पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान के साथ तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। लगभग 25 दिनों से जारी इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय शांति को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित हमलों और अवरोध की आशंकाओं ने तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।

भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से प्राप्त करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर संसद में भी चिंता व्यक्त की। सोमवार को लोकसभा और मंगलवार को राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इस संकट को “गंभीर और चिंताजनक” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सभी संबंधित पक्षों—ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों—के साथ निरंतर संपर्क में है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के प्रयास कर रहा है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और यह संवाद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी कारण उन्होंने अपने अधिकारियों को ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर अगले पांच दिनों तक कोई हमला न करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच इस समय कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास कायम है।

इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया था, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया था।

कुल मिलाकर, ट्रंप और मोदी के बीच हुई यह बातचीत न केवल द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

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