हमें पीएम मोदी पर विश्वास है, भारत में कोई संकट नहीं आएगा : चिराग पासवान

नई दिल्ली, 25 मार्च। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर के साथ-साथ भारत की राजनीति में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में देश को संबोधित करते हुए मौजूदा हालात और उनसे निपटने की तैयारियों का विस्तार से उल्लेख किया, वहीं दूसरी ओर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर पलटवार किया और कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में देशहित को प्राथमिकता देते हुए राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि एकजुटता दिखाने का है।

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दुनिया की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और भारत की सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

चिराग पासवान ने आगे कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में किसी भी तरह की कोई बड़ी मुश्किल पैदा नहीं होगी। सरकार का फोकस आत्मनिर्भरता पर है, जिससे हम वैश्विक संकटों का प्रभाव कम से कम कर सकें।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि विपक्ष लगातार आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझा रहेगा, तो यह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं माना जा सकता।

इसी क्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री बी.एल. वर्मा ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष का असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

बी.एल. वर्मा ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन पर इस युद्ध का प्रभाव पड़ा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। लेकिन भारत सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार है और आम नागरिकों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी भारत ने मजबूती से स्थिति का सामना किया था।

वहीं, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री संसद में देश को संबोधित कर रहे थे, उस समय वे सदन में उपस्थित नहीं थे। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का दायित्व होता है कि वह ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में मौजूद रहकर चर्चा में भाग लें।

जगदंबिका पाल ने कहा कि देश इस समय एक वैश्विक संकट के दौर से गुजर रहा है और प्रधानमंत्री ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में गैर-हाजिरी और बाद में बयान देना उचित नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा, शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी केंद्र सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिलाया है कि मिडिल ईस्ट के हालात से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

समग्र रूप से देखा जाए तो मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने भारत की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। जहां सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और तैयारी का समय बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का अवसर मान रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

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