
डिजिटल हेल्थ क्रांति : तकनीक से बदली तस्वीर
प्रदेश में डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिससे मरीजों का डेटा सुरक्षित और सुलभ हुआ है। माइक्रोसाइट परियोजना के अंतर्गत 35 केंद्रों पर 4.4 लाख से अधिक रिकॉर्ड पंजीकृत किए गए हैं, जो प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान दिलाते हैं।
इसके अलावा यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के माध्यम से बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है। अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की निगरानी के लिए ‘केयर मॉडल’ लागू किया गया है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य : संवेदनशील पहल और व्यापक लाभ
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की पहल अत्यंत प्रभावी रही है। गर्भवती महिलाओं को ई-वाउचर के माध्यम से निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा प्रदान की जा रही है। जननी सुरक्षा योजना के तहत 13.51 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है, जबकि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 8.79 लाख बच्चों का उपचार किया गया है।
दस्तक अभियान के माध्यम से Acute Encephalitis Syndrome और Japanese Encephalitis जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ व्यापक जागरूकता और नियंत्रण अभियान चलाया गया।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की पहल अत्यंत प्रभावी रही है। गर्भवती महिलाओं को ई-वाउचर के माध्यम से निशुल्क अल्ट्रासाउंड सुविधा प्रदान की जा रही है। जननी सुरक्षा योजना के तहत 13.51 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है, जबकि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 8.79 लाख बच्चों का उपचार किया गया है।
दस्तक अभियान के माध्यम से Acute Encephalitis Syndrome और Japanese Encephalitis जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ व्यापक जागरूकता और नियंत्रण अभियान चलाया गया।
स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार : गांव-गांव तक पहुंच
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। आयुष्मान भारत के तहत 22,681 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट योजना में 13.18 करोड़ से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है। साथ ही हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में 81,615 से अधिक पंजीकरण कर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। आयुष्मान भारत के तहत 22,681 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट योजना में 13.18 करोड़ से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है। साथ ही हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में 81,615 से अधिक पंजीकरण कर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।
स्वास्थ्य बीमा योजनाएं : गरीबों को मिला सुरक्षा कवच
राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य हुआ है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 1.31 करोड़ परिवारों के 5.59 करोड़ लोगों के कार्ड बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से 7.34 करोड़ लोगों को लाभ मिला है। वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत 50.64 लाख परिवारों के 1.50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है। अब तक 13,353 करोड़ रुपये खर्च कर 81.55 लाख मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है।
राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य हुआ है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 1.31 करोड़ परिवारों के 5.59 करोड़ लोगों के कार्ड बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से 7.34 करोड़ लोगों को लाभ मिला है। वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत 50.64 लाख परिवारों के 1.50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है। अब तक 13,353 करोड़ रुपये खर्च कर 81.55 लाख मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है।
आपातकालीन सेवाएं : तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया
प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए 4 करोड़ से अधिक लोगों को सहायता मिली है। एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाकर 375 कर दी गई है। एम्बुलेंस सेवाओं की दक्षता बढ़ाते हुए प्रतिदिन की औसत दूरी 60 किमी से बढ़ाकर 120 किमी कर दी गई है। इसके अतिरिक्त मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से 1.80 करोड़ से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है।
प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए 4 करोड़ से अधिक लोगों को सहायता मिली है। एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाकर 375 कर दी गई है। एम्बुलेंस सेवाओं की दक्षता बढ़ाते हुए प्रतिदिन की औसत दूरी 60 किमी से बढ़ाकर 120 किमी कर दी गई है। इसके अतिरिक्त मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से 1.80 करोड़ से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है।
आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं : हर जिले में उपलब्धता
प्रदेश के सभी 75 जिलों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा शुरू की गई है, जिससे 41.46 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। सीटी स्कैन और टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेष राहत मिली है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा शुरू की गई है, जिससे 41.46 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। सीटी स्कैन और टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेष राहत मिली है।
पारदर्शिता और गुणवत्ता : नई संस्थागत पहल
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता आई है। प्रदेश की 798 स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है, जो सेवा गुणवत्ता में सुधार का प्रमाण है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता आई है। प्रदेश की 798 स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है, जो सेवा गुणवत्ता में सुधार का प्रमाण है।
खाद्य सुरक्षा और अनुसंधान : सुरक्षित भविष्य की ओर
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 36 मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है।लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित कर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत किया गया है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रमोद फार्म’ संस्था की स्थापना की गई है।
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 36 मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है।लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित कर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत किया गया है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रमोद फार्म’ संस्था की स्थापना की गई है।
‘उत्तम प्रदेश’ की ओर मजबूत कदम
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में जो परिवर्तन किए हैं, वे न केवल राज्य बल्कि देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभरे हैं। डिजिटल नवाचार, मजबूत अवसंरचना, व्यापक बीमा योजनाएं और गुणवत्ता सुधार के प्रयासों ने प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ की दिशा में अग्रसर किया है। आने वाले समय में भी इन पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं में नए मानक स्थापित करता रहेगा।
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