वाराणसी/उत्तर प्रदेश। देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 'संविधान-हत्या दिवस' के रूप में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आपातकाल की घटनाओं पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई तथा मीसा बंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का प्रयास किया गया था।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में बंद किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ। लोकतंत्र सेनानियों और मीसा बंदियों के संघर्ष व बलिदान के कारण ही देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।
डिप्टी सीएम ने आपातकाल विषयक प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन किया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर लोकतंत्र सेनानियों, उनके परिजनों और भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद भी किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मजबूती ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है तथा नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से अवगत कराना आवश्यक है।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश राजभर, विधायक सुनील पटेल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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