वाराणसी/उत्तर प्रदेश। सिगरा थाना क्षेत्र में ₹2.10 लाख की कथित लूट की सूचना देकर पुलिस को अलर्ट करने वाला मामला जांच में पूरी तरह फर्जी निकला। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज की जांच और पूछताछ के बाद रेलकर्मी ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने कर्ज से बचने के लिए लूट की झूठी कहानी गढ़ी थी।
पुलिस के अनुसार, अमित कुमार श्रीवास्तव, जो रेलवे विभाग में कार्यरत हैं और चंदुआ चित्तूपुर (सिगरा) में किराये के मकान में रहते हैं, ने सूचना दी थी कि वह अपने आवास से ₹2.10 लाख लेकर महमूरगंज स्थित बैंक में जमा करने जा रहे थे। इसी दौरान लोको कॉलोनी के पास तीन अज्ञात बाइक सवारों ने चाकू के बल पर उनसे रुपये लूट लिए। घटना की सूचना उन्होंने डायल-112 पर भी दी थी।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्र पुलिस टीम और एसओजी के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, आसपास के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और शिकायतकर्ता के परिजनों से भी पूछताछ की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान और सीसीटीवी फुटेज में कई विसंगतियां सामने आईं।
पुलिस की सख्त पूछताछ में रेलकर्मी ने स्वीकार किया कि उसने कई लोगों से उधार लिया हुआ था। कर्जदाताओं से बचने और उन पर यह विश्वास दिलाने के लिए कि उसके पैसे लूट लिए गए हैं, उसने लूट की झूठी कहानी बनाई थी ताकि लोग उससे उधार की रकम वापस न मांगें।
पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते फर्जी लूटकांड का समय रहते खुलासा हो गया। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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