Varanasi: काशीवासियों को बड़ी सौगात, 'काशी द्वार' से अब पूरे दिन होंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। बाबा श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाले स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और सुविधाजनक पहल की है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने काशीवासियों को विशेष राहत प्रदान करते हुए 'काशी द्वार' (द्वार संख्या 4-बी) से पूरे दिन दर्शन की नई व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले के बाद अब स्थानीय श्रद्धालुओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर दिनभर किसी भी समय बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिलेगा, जिससे मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और अधिक सुगम एवं व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

मंदिर न्यास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अब काशीवासी श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह 4:15 बजे से लेकर रात 10:45 बजे तक काशी द्वार से मंदिर में प्रवेश कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे। यह समय मंदिर खुलने के 15 मिनट बाद से लेकर मंदिर बंद होने के 15 मिनट पहले तक निर्धारित किया गया है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष सुविधा प्रमुख धार्मिक पर्वों, विशेष आयोजनों तथा अत्यधिक भीड़ वाले अवसरों पर लागू नहीं होगी। उन दिनों श्रद्धालुओं के लिए अलग से व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।

नई व्यवस्था को श्रद्धालुओं का उत्साहजनक समर्थन भी मिल रहा है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को इस सुविधा के पहले ही दिन 8,688 काशीवासी श्रद्धालुओं ने काशी द्वार के माध्यम से बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। वहीं 9 जुलाई को दोपहर 1:30 बजे तक ही 5,196 श्रद्धालु इस विशेष व्यवस्था का लाभ उठा चुके थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि स्थानीय नागरिकों के बीच इस पहल को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय श्रद्धालुओं को अनावश्यक भीड़ से राहत दिलाना, दर्शन प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना तथा सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखना है। इससे श्रद्धालुओं को कम समय में सुगमता के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने का अवसर मिलेगा, वहीं मंदिर परिसर में भी भीड़ प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का मानना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणामों के आधार पर आवश्यकतानुसार व्यवस्था में और सुधार भी किए जा सकते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे मंदिर प्रशासन की सराहनीय पहल बताया है।
और नया पुराने