देसी खबर | नई दिल्ली : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ने के बाद अपने पहले लाइव वर्चुअल संबोधन में 2024 के छात्र आंदोलन को सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया। नई दिल्ली से आयोजित इस संबोधन में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने आंदोलन को बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने इसे हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया।
'यह स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं था'
शेख हसीना ने दावा किया कि आंदोलन का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं था और इसके निर्देश पर्दे के पीछे से दिए जा रहे थे। उनके अनुसार 15 जुलाई 2024 के बाद आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया तथा हत्या, आगजनी, लूटपाट और सरकारी संपत्तियों पर हमले जैसी घटनाएं सामने आने लगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया से बाहर सत्ता परिवर्तन का रास्ता तैयार करना था।
बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर चिंता
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बांग्लादेश भय, असुरक्षा, आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश से दूर होने के बावजूद उनका जुड़ाव बांग्लादेश की जनता से कभी नहीं टूटा।
राजनीतिक उत्पीड़न के लगाए आरोप
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक उत्पीड़न हुआ है। उन्होंने दावा किया कि हजारों लोगों की मौत या गुमशुदगी हुई, लाखों लोगों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र संगठनों, महिला कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यकों, पत्रकारों, वकीलों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
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