जमुई/बिहार। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, जमुई का शुभारंभ रविवार को चंद्रशेखर सिंह संग्रहालय परिसर में किया गया। प्रशिक्षण केंद्र का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी नवीन कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्र जिले के नवोदित कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा निखारने का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य एवं वाद्य वादन का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां तबला, ढोलक, हारमोनियम सहित विभिन्न विधाओं में विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति नामांकन कराकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक विषमताओं और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अब जिले की सांस्कृतिक प्रगति का मार्ग अवरुद्ध नहीं होगा। प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से जमुई के कलाकारों को बेहतर कलात्मक वातावरण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इससे कलाकारों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के लिए जिले से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और न ही उन्हें कोई प्रशिक्षण शुल्क देना पड़ेगा।
सांस्कृतिक विकास को मिलेगी नई गति
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि जमुई जिला परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन जिले के सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र जिले की सांस्कृतिक गतिविधियों और कलाकारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि कला, खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियां मानव के मन-मस्तिष्क को स्वस्थ और सकारात्मक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। समाज में जितनी अधिक सांस्कृतिक गतिविधियां और रचनात्मक आयोजन होंगे, सकारात्मक सोच और सामाजिक चेतना उतनी ही अधिक मजबूत होगी।
युवाओं को रचनात्मक दिशा देने की पहल
जिला पदाधिकारी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रतिभा और रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर है। आवश्यकता है कि युवाओं को सही दिशा और अपनी प्रतिभा के विकास के लिए उचित मंच उपलब्ध कराया जाए। नई पीढ़ी को रचनात्मक एवं सार्थक कार्यों से जोड़ने में इस प्रकार के संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सभ्य और सुसंस्कृत नागरिक बनाने के लिए शिक्षा के साथ-साथ कला और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है। कला व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में भी सहायक होती है।
नवोदित कलाकारों से संवाद करते हुए जिला पदाधिकारी ने उन्हें मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में अपनी रुचि और व्यक्तित्व की विशेषताओं को पहचानकर इच्छित क्षेत्र में निरंतर परिश्रम करने से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे मेहनत करें, अपनी प्रतिभा को निखारें और एक अच्छे कलाकार के साथ-साथ योग्य नागरिक बनने का प्रयास करें।
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